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इग्नू को 16 माह बाद भी नहीं मिला पूर्णकालिक कुलपति

Fri, 01 Feb 2013 08:26 PM IST
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
नई दिल्ली/बृजेश सिंह Updated Fri, 01 Feb 2013 08:26 PM IST
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after 16 months ignou not found full-time vc

इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) 16 महीने से कार्यवाहक कुलपति के भरोसे काम चला रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय अभी तक कुलपति की नियुक्ति पर अंतिम फैसला नहीं ले सका है। सर्च कम सेलेक्शन कमेटी ने जिन तीन नामों की सूची दोबारा मंत्रालय को भेजी है उसमें से ही किसी एक की इग्नू के नए कुलपति के रूप में नियुक्ति का फैसला होना है। इस बीच कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए सांसदों से सिफारिशी पत्र लिखाने को लेकर भी विवाद उठ खड़ा हुआ है।

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उल्लेखनीय है कि इग्नू देश का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे बड़ा ओपन कैंपस विश्वविद्यालय माना जाता है। पूरे देश में इसके सैकड़ों सेंटर हैं जहां लाखों बच्चे प्रोफेशनल एवं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अक्तूबर 2011 में तत्कालीन कुलपति राजशेखरन पिल्लई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यहां कोई नया कुलपति नहीं नियुक्त हो सका है।
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प्रो. पिल्लई के बाद दस महीने तक इग्नू के ही प्रो. असलम तथा उनके बाद अब प्रो. गोपीनाथ प्रधान कार्यवाहक कुलपति के रूप में काम कर रहे हैं। डेढ़ साल से पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति न होने के कारण पूरा विश्वविद्यालय नीतिगत फैसले लेने में अक्षम बना हुआ है तथा कर्मचारियों में भी जमकर गुटबाजी चल रही है।
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असलम के पक्ष में मंत्री को चिट्ठी
सर्च कमेटी ने नए कुलपति के लिए जिन तीन नामों का पैनल भेजा है उनमें आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक संजय धांडे, इग्नू के प्रो. असलम तथा एक अन्य नाम शामिल है। कालाहांड़ी के सांसद भक्तचरण दास ने मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू को पत्र लिखकर प्रो. असलम को कुलपति नियुक्त किए जाने की सिफारिश की है।


सांसद के इस सिफारिशी पत्र को चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा रहा है। दूसरी ओर प्रो. असलम का कहना है कि वे न तो सांसद को जानते हैं और न ही उन्होंने कोई सिफारिशी पत्र ही लिखवाया है। उन्होंने पैनल में खुद का नाम होने की जानकारी से भी इनकार किया।

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