स्नूपगेट मामले में युवती पहुंची सुप्रीम कोर्ट
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गुजरात के चर्चित जासूसी कांड मामले में मंगलवार को नया मोड़ तब आ गया, जब इस प्रकरण की केंद्रबिंदु बनी महिला के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से जांच के लिए आयोग बनाने पर रोक लगाने का आग्रह किया।
सर्वोच्च अदालत ने इस मसले पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। वहीं महिला ने अदालत से कहा है कि वह शुक्रगुजार है कि गुजरात पुलिस उसकी निगरानी कर रही थी। अदालत शुक्रवार को इस याचिका पर अगली सुनवाई करेगी।
पहचान छिपाने की कोशिश
सर्वोच्च अदालत ने मीडिया से भी आग्रह किया है कि इस मामले में महिला का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाए। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई व जस्टिस एनवी रमण की पीठ के समक्ष पिता-पुत्री की संयुक्त याचिका का जिक्र किया गया।
पीठ ने कहा कि वह संबंधित पक्षों को सुने बगैर इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश नहीं दे सकती है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पीठ ने शुक्रवार तक उनसे जवाब तलब किया है।
युवती ने सुरक्षा के लिए जताई खुशी
पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि उनके मुवक्किल की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने के बावजूद तमाम व्यक्ति अलग-अलग कारणों से उनके अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं।
कुमार ने पिता-पुत्री की ओर से तर्क दिया कि जान को खतरा होने पर गुजरात सरकार की ओर से उनकी सुरक्षा के कदम उठाए गए, जिनसे वे संतुष्ट हैं।
आईएएस प्रदीप शर्मा ने लगाए थे आरोप
याचिका में उन्होंने गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा की ओर से वेबपोर्टल के जरिए सामने लाए गए अपुष्ट और अप्रमाणित अंशों के आधार पर जासूसी कांड का मसला उठाए जाने और इसकी सीबीआई जांच की मांग पर भी आपत्ति की है।
इसमें निजता के मौलिक अधिकार और गरिमा के साथ जीने के अधिकार के संरक्षण का भी अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि इस मामले से नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी अमित शाह का नाम जोड़ा है।
आरोप है कि मोदी के कहने पर ही गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री शाह ने युवती की कथित तौर पर जासूसी कराई थी।