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मोदी के विरोध में आडवाणी ने दिया विपक्ष का साथ

Fri, 22 May 2015 10:38 PM IST
Updated Fri, 22 May 2015 10:38 PM IST
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advani supports opposition on net neutrality

भारतीय जनता पार्टी में लगभग हाशिए पर डाल दिए गए दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए विपक्ष का दामन थाम लिया है।

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संसद की स्थायी समिति में नेट न्यूट्रेलिटी के मुद्दे पर उन्होंने विपक्ष का समर्थन किया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत समूचे विपक्ष का मानना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इंटरनेट को कॉर्पोरेट समूहों को कमाई के लिए सौंपना चाहती है।
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हालांकि केंद्र सरकार ऐसे आरोपों से इनकार करती रही है और कहती है रही है कि नेट न्यूटेलिटी की वह भी समर्थक है। और नेट की स्वतंत्रता के लिए तत्पर है।

नेट न्यूट्रेलिटी का मुद्दा पिछले महीने उछला था, जब एयरटेल ने ऐसे इंटरनेट प्लान बाजार में उतारे थे, जिसमें कुछ कंपनियों को सर्चिंग में वरीयता दिए जाने की बात कही गई थी। ये कंपनियां वही थीं, जिन्होंने एयरटेल को उस सुविधा के लिए भुगतान किया था।

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हंगामेदार रही संसद की स्थायी समिति की बैठक

advani supports opposition on net neutrality

नेट न्यूट्रेलिटी के मसले पर इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया को संसदी की स्‍थायी स‌मिति में अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया था।

हालांकि स्‍थायी समिति में शामिल विपक्ष के सदस्यों की मांग थी कि नेट न्यूट्रेलिटी के मसले पर इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों की राय पहले सुनने के बजाय उपभोक्ता फोरम ओवर द टॉप सेवा प्रदाताओं की राय पहले सुनी जाए। सूचना तकनीकी पर बने पैनल में इस मामले पर ‌तीखी नोकझोंक हुई।

लालकृष्ण आडवाणी ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाया। पैनल की प्रमुख अनुराग ठाकुर को तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओब्रायन और कांग्रेस नेता केवीपी रामचंद राव से बहस के कारण बैठक महज 50 मिनट में छोड़नी पड़ी।

आडवाणी ने विपक्ष के सुर में सुर मिलाया

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विपक्ष का कहना था कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के प्रेजेंटेशन के लिए 120 पेज का एक बैकग्राउंड नोट तैयार किया गया। ये बैकग्राउंड नोट सांसदों को गुरुवार को ही दिया गया। सांसदों का कहना है कि समय कम होने के कारण वे इसे देख नहीं पाए।

तृणमूल कांग्रेस नेता प्रसून बनर्जी ने कहा,' मैं इतना पढ़ा लिखा नहीं हूं कि 120 पेज के नोट को 3-4 घंटे में पढ़ लूं।

अनुराग ठाकुर और बीजेपी सांसद सुनील गायकवाड़ का कहना था‌ कि मीटिंग आगे बढ़ाई जाए और कंपनियों का अपना पक्ष रखने दिया जाए। आडवाणी की बारी आई तो उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्यों का साथ देने के बजाय कहा कि विपक्ष की बात ठीक है और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की मीटिंग टाल दी जाए।

आडवाणी का समर्थन मिलते ही विपक्षी सांसदों के तेवर तीखे हो गए। उन्होंने कहा कि चूंकि आडवाणी की राय है कि बैठ‌‌क टाल दी जाए, इसलिए बैठक टाल दी जाए।

आडवाणी का साथ पाकर खुश हुआ विपक्ष

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हालांकि अनुराग ठाकुर ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को कम से कम अपना प्रेजेंटेशन देने दिया जाए और पैनल के सदस्य उनसे सवाल-जवाब बाद में कर लेंगे। जब ये बहस हो रही थी, कंपनियों के प्र‌तिनिधि बाहर इंतजार कर रहे थे।

हालांकि विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि क्रिकेट के मैच में बैटिंग और फिल्डिंग अलग-अलग नहीं होती। इसलिए दूसरे पक्ष को भी सुनने के लिए बुलाया जाए। आडवाणी का साथ मिलने के बाद विपक्षी सदस्यों ने अधिक तीखे होकर अपनी बात रखी और अंततः बीच में ही मीटिंग खत्‍म करनी पड़ी।

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