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संघ ने माना, आडवाणी के इस्तीफे से लगा था धक्का
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jun 2013 01:54 AM IST
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नरेंद्र मोदी का कद बढ़ाने पर भाजपा में जारी शीतयुद्ध के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी के अचानक इस्तीफे से सबको धक्का लगा था।
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साथ ही संघ ने आडवाणी के इस्तीफे में पार्टी से की गई अपेक्षाओं को सही ठहराया है। संघ आडवाणी को मनाने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के पहल को भी उचित मानता है।
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संघ के मुखपत्र पांचजन्य में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने अपने लेख से यह संकेत देने की कोशिश की है कि भागवत ने किसी के अनुरोध पर पूरे मामले में बीच बचाव किया था।
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लेख में यह भी संदेश देने की कोशिश की गई है कि संभवत: संकट के समय आडवाणी ने ही भागवत से संपर्क साधा था।
लेख में कहा गया है कि आडवाणी ही अपने त्यागपत्र का सही कारण बता सकते हैं। जहां तक इस्तीफे में उनकी पार्टी से की गई अपेक्षाओं की बात है तो वे सही हैं। मगर उनके अचानक त्यागपत्र से संघ प्रमुख सहित सभी को धक्का लगा था।
वैद्य ने स्वीकार किया है कि संकट सुलझाने के लिए भागवत-आडवाणी के बीच तत्काल संवाद स्थापित कराने के प्रयास हुए।
बकौल वैद्य इस्तीफा वापस दिलवाने के लिए भागवत का प्रयास सही था, क्योंकि आडवाणी जैसे अनुभव के धनी और वयोवृद्ध नेता का पार्टी में बने रहना जरूरी था।
वैद्य ने इस पूरी प्रक्रिया से संघ का भाजपा में हस्तक्षेप साबित होने और संघ के खुल कर सक्रिय राजनीति में उतरने संबंधी आलोचकों के हमले को उपदेश करार दिया।
उन्होंने कहा कि संघ के लिए राष्ट्र का महत्व सबसे अधिक है। राजनीति तो महज सामाजिक जीवन का एक क्षेत्र है।
अपने पूरे लेख में वैद्य ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि विवाद के दौरान भागवत ने किसी के अनुरोध पर बीच-बचाव किया।
वैद्य ने लिखा है कि किसी ने संकट के दौरान भागवत से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया होगा। वैद्य ने यह भी लिखा है कि संकट के समय आडवाणी ने भागवत को फोन किया या भागवत ने आडवाणी को इस पर बहस करना बेकार है।
माना जा रहा है कि ऐसा लिख कर वैद्य ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पूरे मामले में आडवाणी ने ही संघ प्रमुख से संपर्क साधा था।