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नई पीढ़ी के आगे आडवाणी को क्यों झुकना पड़ा?
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Wed, 12 Jun 2013 10:58 AM IST
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अयोध्या के राममंदिर आंदोलन के पुरोधा रहे लालकृष्ण आडवाणी अपने इस्तीफे के सियासी दांव से भाजपा में अलग-थलग पड़ते जा रहे थे।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता सियासी संबंधों के चलते उनसे मिलने जाते भी रहे लेकिन कार्यकर्ता समर्थन में आने की बजाय सोशल मीडिया पर उन्हें ही कोसते रहे।
संघ और भाजपा का कड़ा रुख
संघ और भाजपा के कड़े रुख को देखते हुए आडवाणी के पास नरम पड़ने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रह गया था।
हालांकि यह मामला फिलहाल भले ही सुलझता दिख रहा हो, लेकिन अभी इसकी चिंगारी बची है और माना जा रहा है कि अपनी अनदेखी होने पर आडवाणी आगे भी इसी तरह का सियासी दांव चल सकते हैं।
पार्टी के भीतर नहीं मिला समर्थन
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह आडवाणी से मिलने के बाद मंगलवार सुबह राजस्थान चले गए, जबकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली अपने तय कार्यक्रम के अनुसार विदेश रवाना हो गए।
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इससे साफ संकेत चला गया कि आडवाणी प्रकरण को पार्टी अब ज्यादा भाव नहीं देगी क्योंकि संसदीय बोर्ड से इस्तीफा नामंजूर होने के बाद पार्टी आधिकारिक तौर पर इस मामले को खत्म मान रही थी।
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बस मामला आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता के सम्मान से जुड़ा रह गया था। इसलिए पार्टी व संघ के कहने पर नरेंद्र मोदी ने भी आडवाणी को मनाने का प्रयास किया।
इस तरह की औपचारिकताओं को छोड़ दें तो आडवाणी को पार्टी के भीतर कोई ठोस समर्थन नहीं मिल पाया। पार्टी के कई कार्यकर्ता तो उनके घर के आगे ही खुशी मनाकर मिठाई भी बांट चुके थे।
जयपुर में राजनाथ ने भी साफ कर दिया कि नरेंद्र मोदी को लेकर किया गया फैसला वापस नहीं होगा। जबकि संघ पहले से साफ कर चुका था कि आडवाणी मान जाते हैं तो ठीक है, अन्यथा भाजपा को आगे बढ़ लेना चाहिए।
मोहन भागवत की सलाह
पिछले 30 घंटों से नाराज आडवाणी को संघ प्रमुख मोहन भागवत की सलाह के बाद समझ आ गया कि अब पार्टी में उन्हें ज्यादा समर्थन नहीं मिलने वाला है।
उनके खेमे के यशवंत सिन्हा और उमा भारती पहले ही मोदी को लेकर राजनाथ सिंह के फैसले का समर्थन कर चुके थे। इसलिए जब पार्टी की ओर से शाम को उन्हें मनाने के लिए अंतिम प्रस्ताव आया तो उनके पास मानने के अलावा दूसरा चारा ही नहीं था।
इधर यह चर्चा भी तेज रही कि भाजपा नेताओं ने एक फॉर्मूले के तहत आडवाणी को मनाया है। हालांकि राजनाथ सिंह ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
उन्होंने इतना जरूर कहा कि हमने आडवाणी जी को भरोसा दिलाया है कि पार्टी चलाने को लेकर उनकी सभी चिंताओं को दूर किया जाएगा और मैं खुद उनसे बात करूंगा।
लेकिन सूत्रों ने बताया कि मोदी को चुनाव समिति की कमान सौंपे जाने से नाराज आडवाणी को भरोसा दिया गया है कि पार्टी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार आम राय से ही तय करेगी, उनकी राय भी ली जाएगी। यानी पीएम उम्मीदवार को लेकर अभी सभी विकल्प खुले हैं।