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जब एक सुर में बोले आडवाणी और मोदी...
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 24 Jun 2013 11:43 AM IST
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कुछ दिन पहले भाजपा कार्यकारिणी में चुनाव प्रचार समिति का जिम्मा नरेंद्र मोदी को सौंपा गया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मुंह फुला लिया था।
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आरएसएस की दखलअंदाजी और समझाने-मनाने के बाद वह इस्तीफा वापस लेने पर राजी हुए। लेकिन जो बीत गया, तो सो बीत गया। इस पूरे विवाद के बाद दोनों नेता फिर एक सुर में बोलते नजर आ रहे हैं।
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और दोनों नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, यह साफ है कि भगवा दल एक बार फिर हिंदुत्व के मुद्दे पर दांव लगाने को तैयार है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एक बार फिर धारा 370 को खत्म करने की मांग की है, जो जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देता है।
अपने ब्लॉग में जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा, 'देश उस दिन का शिद्दत से इंतजार कर रहा है, जब धारा 370 निरस्त कर दी जाएगी और दो विधान एक हो जाएंगे।'
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कुछ इससे मिलता-जुलता बयान मोदी ने भी दिया है। पंजाब के पठानकोट में हुई रैली में गुजरात के मुख्यमंत्री ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया और कश्मीर के युवाओं पर फोकस किया।
उन्होंने कहा, 'वाजपेयी ने प्यार, लगाव और बातचीत से कश्मीर का दिल जीतने की कोशिश की थी...अगर वह 2004 में चुनकर सत्ता में पहुंचते, तो कश्मीर नीति को लेकर उन्हें कामयाबी भी मिल जाती।'
मोदी के मुताबिक कश्मीरी नौजवान भी विकास और प्रगति चाहते हैं और इसके लिए उन्हें मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'कश्मीर घाटी के नौजवान विकास चाहते हैं। बंदूके खून बहा सकती हैं, लेकिन कुछ भला नहीं कर सकतीं।'
मोदी और आडवाणी के इन बयानों से कुछ भौंहे तन सकती हैं, क्योंकि धारा 370 को खत्म करने की मांग भाजपा ने ठंडे बस्ते में डाली हुई थीं, क्योंकि एनडीए के दूसरे साझेदारों को इससे दिक्कत थी। लेकिन जनता दल यूनाइटेड के विदा लेने के बाद पार्टी इन मुद्दों पर दोबारा लौट सकती है।
भाजपा ने हिंदुत्व एजेंडे के तीन मुख्य मुद्दों को दरकिनार कर रखा था, ताकि एनडीए के तहत ज्यादा से ज्यादा दलों को लाया जा सके। इनमें यूनिफॉर्म सिविल कोड, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और धारा 370 को निरस्त करना शामिल है।