फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   advani always enjoys the company of controversy

विवादों के रथ पर सवार लालकृष्ण

Mon, 10 Jun 2013 05:45 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 10 Jun 2013 05:45 PM IST
विज्ञापन
advani always enjoys the company of controversy

इस बात से सभी वाकिफ हैं कि भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी की प्रधानमंत्री बनने की चाहत किस हद तक है। नरेंद्र मोदी को पार्टी में तरजीह मिलते ही उन्होंने ब्रह्मास्त्र चल दिया। पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया, तो छोटे से लेकर बड़े तक, सभी नेता रूठे आडवाणी को मनाने में जुट गए।

विज्ञापन


लेकिन विवादों से दूरी बनाए रखना न तो आडवाणी की राजनीति रही है और न ही स्वभाव। रथयात्रा हो या जिन्ना की तारीफ, वह बवालों के बीच फंसते रहे हैं। और बीते कुछ साल के दौरान ऐसा कुछ ज्यादा होने लगा है। आइए गौर करें आडवाणी के कारण भाजपा में पैदा हुए हालिया विवादों सेः
विज्ञापन


26 मई, 2012
आडवाणी ने मुंबई में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद रैली में हिस्सा नहीं लिया। वह नितिन गडकरी को दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने के प्रस्ताव से खफा थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


3 सितंबर, 2012 अपने ब्लॉग में उम्मीद जताई कि देश का अगला प्रधानमंत्री न तो कांग्रेस का होगा और न भाजपा का।

9 मार्च 2013 आडवाणी ने पार्टी की मीटिंग में कहा, 'बीते कुछ साल के दौरान मुझे इस बात से काफी निराशा होती है कि लोगों का मूड मौजूदा सत्तारूढ़ दल के खिलाफ है, लेकिन साथ ही वे खुद को भाजपा के भी करीब महसूस नहीं करते।'

12 मई 2013 फिर अपने ब्लॉग में लिखा कि अगर भाजपा कर्नाटक में जीतने में कामयाब रही, तो उन्हें इस बात पर हैरानी होगी।

7 जून 2013 गोवा कार्यकारिणी से नदारद। शुरुआत में बीमारी का बहाना लगाया गया। लेकिन सोमवार को सारा माजरा खुल गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed