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...तो अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे आडवाणी

Thu, 13 Jun 2013 08:06 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Thu, 13 Jun 2013 08:06 AM IST
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advani age factor may trouble in coming lok sabha election

भाजपा के ‘भीष्म पितामह‘ लालकृष्ण आडवाणी भले ही अब कोपभवन से बाहर आ चुके हों, लेकिन उनकी अगली सियासी पारी की राह में पार्टी के अंदर से ही उम्र की बाधा उत्पन्न करने की नई जमीन तैयार होने लगी है।

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विरोधी खेमा अब पार्टी में उम्रदराज नेताओं की भूमिका को लेकर आवाज उठाने की मुहिम शुरू करने जा रहा है। आडवाणी खेमे के माने जाने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटा.) बीसी खंडूरी ने मोदी समर्थकों की राह आसान कर दी है।
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खंडूरी ने कहा है कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी लंबे समय से कहता रहा है कि नई पीढ़ी को आगे लाने के लिए पार्टी के उम्रदराज नेताओं को चुनावी राजनीति से हट जाना चाहिए।
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पार्टी के पूर्व महासचिव संघप्रिय गौतम तो कुछ समय पहले आडवाणी को पत्र लिखकर संन्यास लेने की सलाह भी दे चुके हैं। इसलिए जल्दी ही भाजपा में उम्रदराज नेताओं को आगामी लोकसभा की चुनावी जंग से दूर रखने की मांग जोर-शोर से उठती दिखाई दे सकती है।

यदि ऐसा होता है तो आडवाणी ही नहीं डॉ. मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह, कल्याण सिंह, शांता कुमार, लालजी टंडन, यशवंत सिन्हा, कैलाश जोशी आदि बुजुर्ग सांसदों के लिए लोकसभा की राह मुश्किल हो जाएगी। अलबत्ता राज्यसभा का दरवाजा खुला रहेगा।

भाजपा में वैसे तो उम्रदराज नेताओं को चुनावी महासमर में नहीं उतारने संबंधी संघ की सलाह पर चर्चा लगभग बंद हो गई थी। लेकिन गोवा सम्मेलन के बाद भाजपा की खुशी में खलल का कारण बने आडवाणी की राह में कांटे बिछाने के लिए यह मुद्दा अब उछाले जाने की तैयारी हो रही है।


नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के बाद जनता दल (यू) के तीखे तेवरों के पीछे भी विरोधी खेमा अब आडवाणी कैंप का ही हाथ मान रहा है। इसलिए गोवा से शुरू शह और मात के इस सियासी खेल के और तेज होने की संभावना है।

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