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सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट के लाभार्थी ढूंढ़ो तो जानें

Tue, 16 Oct 2012 03:07 PM IST
फर्रुखाबाद/सिद्धार्थनगर/ब्यूरो
फर्रुखाबाद/सिद्धार्थनगर/ब्यूरो Updated Tue, 16 Oct 2012 03:07 PM IST
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addresses and names do not match in khurshid trust scam

सलमान खुर्शीद के विकलांग कल्याण ट्रस्ट द्वारा बांटे गए उपकरणों के लाभार्थियों की सूची की प्रमाणिकता की जांच शुरू हो गई है। पता चला है कि फर्रुखाबाद में उपकरण मुहैया कराने वाली सूची में जिन लाभार्थियों का नाम है, उसमें से ज्यादातर न तो विकलांग हैं और न ही संबंधित पते पर रहते हैं। वहीं, सिद्धार्थनगर में भी इस ट्रस्ट की ओर से जिन 24 लोगों को उपकरण बांटे गए हैं, उनके नाम पते संदिग्ध हैं।

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स्टिंग ऑपरेशन में डॉ. जाकिर हुसैन ट्रस्ट के कारनामों का खुलासा करने वाले फर्रुखाबाद जिले के पितौरा के कोल्हू मिस्त्री रंगी दिल्ली से लौट आए हैं, लेकिन अपने घर-दुकान से गायब मिले। पुलिस भी उन्हें तलाश रही है। उधर, सत्यापन में सूचीबद्ध विकलांग नहीं मिल रहे हैं। इससे ट्रस्ट पर अंदेशा गहराता जा रहा है। सोमवार को इंडिया अगेंस्ट करप्शन व अमर उजाला की पड़ताल में कई नाम ऐसे भी मिले, जो विकलांग हैं ही नहीं।   
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सिद्धार्थनगर में भी 24 लाभार्थियों के नाम पते संदिग्ध हैं। विकलांग कल्याण अधिकारी का कहना है कि उन्हें शासन स्तर से जिन लोगों को उपकरण देने थे, उनकी सूची प्रमाणित करने काम सौंपा गया था पर सूची प्रमाणित नहीं हो सकी। इसी बीच पता चला कि 25 जनवरी, 2010 को उसका बाजार के आसपास कैंप लगाकर उपकरण बांट दिए गए। अब राष्ट्रीय स्तर पर यह मामला उछलने पर पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा है।
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लाभार्थी सूची में एक नाम ऐसा है, जिसका पता ग्राम नौगढ़ और ब्लाक शोहरतगढ़ दिखाया गया है। नौगढ़ ब्लाक के अंतर्गत पुरानी नौगढ़ एक जगह है और यहां नगर पालिका के सात वार्ड यानी सात मुहल्ले हैं। यहां चार लोगों को उपकरण बांटे गए हैं। इसी प्रकार ग्राम और पोस्ट डुमरियागंज ब्लाक डुमरियागंज के पते पर छह उपकरण बांटे गए हैं। वास्तविकता यह है कि ग्राम और पोस्ट डुमरियागंज नाम की कोई जगह नहीं है। डुमरियागंज नगर पंचायत है और इसके अंतर्गत 11 वार्ड हैं। इसी तरह से ग्राम और पोस्ट बांसी ब्लाक मिठवल के नाम से तीन उपकरण दिए गए हैं, जबकि मिठवल ब्लाक में ग्राम और पोस्ट बांसी नाम की कोई जगह है ही नहीं।

'मुझे सिर्फ सूची मिली'
जिला विकलांग कल्याण अधिकारी एसएन तिवारी कहते हैं कि यह काफी पुराना मामला है। अब तक जो पता किया गया है उसके अनुसार विभाग को 24 विकलांगों की सूची मिली थी, जिनके हस्ताक्षर सत्यापित कराने थे पर प्रमाणित नहीं हो सके। उपकरण मिला या नहीं इसकी जानकारी नहीं है।


'मामला सामने आया तो कराएंगे जांच'
एडीएम राम मनोहर मिश्र कहते हैं कि अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही शासन से भी कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है।

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