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'गैंगरेप मामले में लोगों का पुलिस से विश्वास उठा'

Sat, 05 Jan 2013 08:16 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 05 Jan 2013 08:16 PM IST
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activists slam delhi police response in gangrape case

16 दिसंबर की रात चलती बस में दरिंदगी का शिकार हुई युवती और उसके दोस्त को मदद पहुंचाने में बेवजह की देरी के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की है।

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सभी ने खौफनाक घटना वाले दिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस खुलासे ने दिल्ली पुलिस के व्यवहार को उजागर कर दिया है।  
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पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने कहा कि घटना स्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मी खुद एफआईआर दर्ज कर सकते थे क्योंकि किसी कानून में यह नहीं कहा गया है कि किसी खास पुलिस थाने में ही मामला दर्ज हो सकता है।
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यह रोजमर्रा की बात हो गई है। इसी वजह से लोगों का पुलिस से विश्वास उठ गया है। यह काफी लंबे समय से चल रहा है और वे अब पकड़े गए हैं। कोई भी कानून पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से नहीं रोकता है। एक थाने पर एफआईआर दर्ज करने के बाद उसे दूसरी जगह ट्रांसफर किया जा सकता है।   

बेदी दिल्ली गैंगरेप पीड़ित युवती के दोस्त के पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दे रही थीं। युवती के दोस्त ने एक न्यूज चैनल पर शुक्रवार को आरोप लगाते हुए कहा था कि घटना वाले दिन 3 पीसीआर वैन पहुंची थी लेकिन वे काफी देर तक इलाके के अधिकार क्षेत्र को लेकर ही आपस में उलझी रहीं।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि दो लोग घायल अवस्था में जमीन पर पड़े हुए थे।

मानवता के चलते भी उन्हें अस्पताल ले जाना चाहिए था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। उस दिन ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर पीड़िता के दोस्त के इंटरव्यू के बाद फेसबुक और ट्विटर पर भी लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।


पीड़िता के दोस्त ने शुक्रवार को एक नेशनल न्यूज चैनल पर दावा किया था कि पुलिस समेत किसी ने भी उनकी मदद नहीं की और न ही एंबुलेंस को बुलाया। वे केवल हमें निहार रहे थे। उसने लोगों से पीड़िता को ओढ़ाने के लिए कपड़ा मांगा लेकिन किसी ने नहीं दिया।

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