क्या यूपी के सैकड़ों कारखाने हो जाएंगे बंद?
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गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषित करने वाले यूपी के नौ सौ से अधिक कारखानों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। नेशनल ग्रीन ट्र्यूबनल (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) ने गाजियाबाद से वाराणसी के बीच ऐसे 956 कारखानों को नोटिस जारी कर अवजल रोकने की चेतावनी दी है।
एनजीटी ने इन उद्योग प्रबंधनों को आठ महीने का समय देते हुए कहा है कि अगर वे अपना डिस्चार्ज शून्य नहीं कर पाए तो उनके संचालन पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस सूची में पूर्वांचल के भी 20 से अधिक कारखाने शामिल हैं।
औद्योगिक अवजल के बहाव से होने वाले प्रदूषण को लेकर हापुड़ धनवली अट्टा गांव निवासी कृष्णकांत सिंह की शिकायत पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा, यमुना और अन्य सहायक नदियों के आसपास यूपी में स्थापित इन कारखानों की सूची तैयार कर एनजीटी को सौंपी थी।
नदियों में धड़ल्ले से अवजल बहा रहे कारखाने
बोर्ड के मुताबिक ये वो कारखाने हैं जिनका अवजल धड़ल्ले से नदियों में बहाया जा रहा है। पर्यावरण से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए गठित एनजीटी ने गंगा प्रदूषण पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए सात जुलाई को राज्य के 956 कारखानों को नोटिस जारी किया है।
इसमें गाजीपुर की लार्ड डिस्टलरी लिमिटेड, सरकारी अफीम एनं क्षारओड कारखाना, ओवीटी लिमिटेड गोपीगंज (संत रविदास नगर), दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड, रामनगर, नेवल कोलकाता, गंगा पल्प एंड पेपर लिमिटेड, ओंकार पेपर एंड बोर्ड मिल (चारों कारखाने चंदौली में हैं), डीएलडब्ल्यू वाराणसी, हिंदुस्तान कोकाकोला मेहंदीगंज के अलावा इलाहाबाद के नौ कारखाने शामिल हैं। गंगा में अवजल बहाने वाले सबसे अधिक 402 कारखाने कानपुर के हैं, जिन्हें नोटिस जारी किया गया है।
इनके अलावा मऊ, मिर्जापुर, मुजप्फरनगर, मेरठ, फर्रुखाबाद, जेपीनगर, बुलंदशहर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली, बिजनौर, बुलंदशहर और गाजियाबाद के उद्योगों को भी एनजीटी ने चेताया है।
'कारखानों को अवजल रोकने के लिए किया जाएगा मजबूर'
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.टीएन सिंह ने बताया कि इन उद्योग प्रबंधनों को तत्काल डिस्चार्ज रोकने और ऑनलाईन मानीटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी हिदायत दी गई है कि प्रबंधन अपने-अपने कारखानों का अवजल शोधित करने के साथ ही उसे अपने ही उपयोग में लाएं ताकि शोधित होने के बाद भी उस पानी की एक बूंद गंगा, यमुना या उसकी सहायक नदियों में न जाने पाए।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वाराणसी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. टीएन सिंह ने कहा कि गंगा, यमुना, वरुणा, गोमती समेत अन्य सहायक नदियों को प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार कारखानों की नकेल कसी जा रही है। तीन सेक्टर में बांटकर इनकी मानीटरिंग कराई जाएगी, ताकि पता लग सके कि औद्योगिक प्रबंधनों ने कितनी संजीदगी दिखाई। ऐसे कारखानों को अवजल रोकने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा।