एसिड हमले को जघन्य अपराध बनाएगी मोदी सरकार
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देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते एसिड हमलों को देखते हुए केंद्र सरकार का इरादा ऐसे मामलों को जघन्य अपराध की श्रेणी में लाने का है। साथ ही ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई समयबद्ध ढंग से कराने की तैयारी है ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
गृह मंत्रालय ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि ऐसे सभी मामले जिनमें अधिकतम सजा उम्रकैद या फांसी संभव हो, को जघन्य अपराधों की श्रेणी में लाया जाएगा।
फौजदारी कानून (संशोधन) अधिनियम 2013 के तहत एसिड हमले के मामले में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को 10 साल या उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। ऐसे अपराधों की सुनवाई (आईपीसी की धारा 376ए-डी के तहत) 60 दिन के अंदर पूरी होने की बात कही गई है।
गृह मंत्रालय की अब अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में उपयुक्त संशोधन कर ऐसे जघन्य आपराधिक मामलों की समयबद्ध ढंग से जांच और सुनवाई पूरी करने का प्रावधान करने की योजना है। सरकार कानून में ऐसे उचित बदलाव करने का भी प्रस्ताव ला रही है।
जांच और सुनवाई समयबद्ध कराने की तैयारी
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एसिड हमलों को रोकने के लिए कानूनी और प्रशासनिक फ्रेमवर्क को मजबूत करने का निर्णय लिया है। सरकार ने एसिड की बिक्री के नियमन के लिए भी कई कदम उठाए हैं।
इसमें एसिड हमले के दोषियों को ज्यादा सजा दिलाने के साथ ही पीड़ितों को अधिक मुआवजा देने जैसे कदम भी शामिल हैं। अभी तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश ने एसिड बिक्री के नियमन के लिए नियम तैयार किए हैं।
हालांकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में अभी भी एसिड आराम से मिल रहा है। देशभर में हर महीने करीब 400 मामले एसिड हमले के दर्ज होते हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।