बालकृष्ण पर चल रहे केस बंद, जानिए खास बातें
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बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण को मिल गई है बड़ी राहत। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ चल रहा मनी लॉंड्रिंग का दो साल पुराना मामला बंद कर दिया है।
ईडी ने कहा है कि उसे बालकृष्ण के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला और इसी वजह से अब इस मामले को चलाने का कोई औचित्य नहीं है।
बालकृष्ण पर अपने शैक्षणिक दस्तावेजों में हेराफेरी, जाली पासपोर्ट और विदेशों में धन जमा करने के आरोप थे। सीबीआई ने 23 जुलाई 2011 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बालकृष्ण उस वक्त चर्चा में आए थे जब वह रामदेव के साथ दिल्ली में अनशन में शामिल हुए। इसके बाद से उन पर शिकंजा कसना शुरू हो गया था।
आचार्य बालकृष्ण से जुड़े विवादों के बारे में
दरअसल सीबीआई को शिकायत मिली थी रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण नेपाल के नागरिक हैं और उन्होंने भारत में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवा रखा है।
खबर के मुताबिक उन्होंने 1997 में बरेली के पासपोर्ट कार्यालय से जो पासपोर्ट बनवाया था उसमें अपना पता हरिद्वार का लिखवाया था। साथ ही उन्होंने बताया था कि उन्होंने बुलंदशहर के खुर्जा के एक कॉलेज से डिग्री ली है।
सीबीआई ने बालकृष्ण के जन्म प्रमाण के लिए हरिद्वार नगर निगम का कार्यालय खंगाला तो वहां कोई रिकार्ड नहीं मिला। सीबीआई ने उस वक्त बालकृष्ण की डिग्री समेत उनके तमाम शैक्षिक प्रमाणपत्रों को फर्जी बताया था।
बालकृष्ण कहां के: नेपाल के या भारत के
आचार्य बालकृष्ण को बाबा रामदेव का सबसे खास माना जाता है। उनके समर्थक दावा करते हैं कि वे जड़ी बूटियों के बारे में बहुत अधिक जानकारी रखते हैं।
आचार्य बालकृष्ण हमेशा इन आरोपों को खारिज करते हैं कि वे नेपाल के नागरिक हैं और उनका पासपोर्ट जाली है। उनके मुताबिक वे नेपाली मूल के भारतीय नागरिक हैं और उनका जन्म हरिद्वार में हुआ था। वे कहते हैं कि भारतीय संविधान के मुताबिक अब मैं भारत का नागरिक हूं।
वे स्वीकार करते हैं कि उनके माता-पिता नेपाली मूल के हैं लेकिन साथ में ये जरूर जोड़ते हैं कि उनका जन्म हरिद्वार में हुआ है और उनकी शिक्षा-दीक्षा भी भारत में हुई है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भी आचार्य बालकृष्ण पर आरोप लगाया था कि वे नेपाल के नागरिक हैं और उनके पास नेपाल का पासपोर्ट है।
रामदेव के कारोबार में भी हिस्सेदार
बाबा रामदेव के संस्थान ने पिछले एक दशक में दवाओं और खाद्य पदार्थों का कारोबार बहुत बढ़ाया और आज इसका आकार करोड़ों रूपए आँका जाता है। पतंजलि के नाम से पूरे देश में उनके रिटेल आउटलेट हैं जहां दवाओं के खाद्य भी बेचे जाते हैं।
बालकृष्ण इस कारोबार में रामदेव के हिस्सेदार हैं। हालांकि पतंजलि की दवाओं पर अक्सर विवाद भी होता रहता है। ऐसा ही एक बड़ा विवाद 2005 में भी सामने आया था जब उनके ही आश्रम में काम करनेवाले कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया था कि उनकी दवाओं में हड्डियों का चूरा मिलाया जाता है।
सीपीएम नेता वृंदा कारत ने भी इस मामले को उठाया था लेकिन साल 2006 में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।