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'कोई आरोपी सांसद बन सकता है लेकिन पुलिसकर्मी नहीं'

Thu, 04 Jul 2013 04:55 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 04 Jul 2013 04:55 PM IST
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accused can become mp, but not go in police

किसी शख्स पर आपराधिक केस चलता है तो वह चुनाव लड़ सकता है और सांसद तक बन सकता है लेकिन वह पुलिस में नौकरी नहीं कर सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला चल रहा हो तो उसकी पुलिस में किसी भी स्तर पर भर्ती नहीं की जाएगी।
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न्यायाधीश जी एस सिंघवी और रंजना देसाई की बेंच ने मंगलवार को कहा कि पुलिस बल में शामिल होने के लिए किसी व्यक्ति को पूर्णता ईमानदार और साफ चरित्र वाला होना चाहिए। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले शख्स को यहां जगह नहीं मिल सकती।
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उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पुलिस की छवि बेहद खराब हुई है ऐसे में अपनी विश्वसनीयता खो चुके लोगों को पुलिस में शामिल नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मेहर सिंह की शिकायत पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया। मेहर सिंह ने पुलिस कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन किया था और सभी परीक्षाएं पास कर ली थीं लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक मामला होने के कारण न्यायालय ने उनकी पात्रता रद्द कर दी।

क्या था मामला
मेहर सिंह और उनके साथियों का साल 2004 में एक बस कंडकटर से टिकट खरीदने को लेकर झगड़ा हो गया था। उन्होंने कंडक्टर को बुरी तरह मारा, बस के शीशे तोड़ दिए और कंडकटर को बचाने आए लोगों को भी नुकसान पहुंचाया।

पांच साल तक केस चलने के बाद साल 2009 में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और ट्रायल कोर्ट ने मेहर सिंह को छोड़ दिया। इसी साल दिल्ली पुलिस ने कान्सटेबल के पदों पर नौकरियां भी निकाली थीं।

मेहर सिंह ने नौकरी के लिए आवेदन किया और शारीरिक, लिखित परीक्षा व साक्षात्कार पास कर लिया। यहां तक पहुंच जाने के बाद स्क्रीनिंग कमेटी को मेहर की आपराधिक पृष्ठभूमि का पता चला।


इसके बाद मेहर के हिंसक स्वभाव और देश के कानून के लिए सम्मान न होने के आधार पर कमेटी ने नियुक्ति के लिए सिफारिश नहीं की।

कैट, हाइकोर्ट का फैसला पलटा
मेहर सिंह ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सबसे पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में अपील की जहां उनके हक में फैसला आया। फिर दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाइकोर्ट में अपील की लेकिन वहां भी मेहर के पक्ष में फैसला आया।

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कैट और दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि पुलिस उन लोगों की पहचान करे जिन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि होने के बाद भी नियुक्ति मिल गई है।

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