आरुषि केसः रोते रहे राजेश-नूपुर, नहीं खाया खाना

अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 26 Nov 2013 11:19 AM IST
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दोषी करार दिए जाने के बाद डासना जेल ले जाए गए राजेश और नूपुर तलवार लगातार रोते रहे। उन्होंने रात में खाना खाने से भी इनकार कर दिया।
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दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच अलग-अलग सेल में रखा गया है। जेल के एक अधिकारी ने बताया कि हमने राजेश और नूपुर को शांत करने की काफी कोशिश की, लेकिन वे रोते रहे।
इससे पहले साढे़ पांच साल पुरानी सनसनीखेज आरुषि-हेमराज मर्डर मिस्ट्री से सोमवार को पर्दा उठ गया। गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने माना कि डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार ने ही अपनी बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या की थी।

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अदालत ने दोनों को हत्या करने और सुबूत मिटाने का दोषी माना है। राजेश तलवार को झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का भी दोषी माना गया है। दोनों की सजा पर बहस मंगलवार को होगी। नोएडा के प्रतिष्ठित डेंटिस्ट दंपति को उम्रकैद से लेकर अधिकतम फांसी तक की सजा सुनाई जा सकती है।

फैसले पर टिकी थीं पूरे देश की नजरें
तमाम नाटकीय मोड़ों और उठापटक से गुजरने के बाद आए इस फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी थीं। दोषी करार दिए जाते ही राजेश (49) और नूपुर (48) कोर्ट में फफक कर रो पडे़। उन्हें हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच डासना जेल भेज दिया गया। जेल में राजेश को बैरक नंबर 11 और नूपुर को 13 नबंर महिला बैरक में रखा गया है।

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आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत दोषी
15 महीने की सुनवाई के बाद दिए अपने 204 पन्नों के फैसले में जज श्याम लाल ने कहा कि तलवार दंपति ने हत्याएं करने के बाद खुद को बचाने के लिए सुबूतों को नष्ट कर दिया। दोनों को आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत दोषी करार दिया जाता है।

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अदालत ने राजेश पर नोएडा के थाने में झूठी एफआईआर करने के लिए धारा 203 भी लगाई है। इस एफआईआर में राजेश ने कहा था कि उनकी बेटी की हत्या हेमराज ने की है। मालूम हो कि नोएडा के जलवायु विहार स्थित फ्लैट में 14 वर्षीय आरुषि और नेपाली नौकर हेमराज की 15 मई, 2008 की रात को हत्या कर दी गई थी। नौवीं में पढ़ रही आरुषि का कुछ ही दिन बाद जन्मदिन आने वाला था।

क्लोजर रिपोर्ट को माना चार्जशीट
इस मामले में सबसे अहम टर्निंग प्वाइंट तब आया, जब दिसंबर 2010 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि हमारे पास तलवार दंपति के खिलाफ ठोस सुबूत नहीं हैं। लेकिन जज ने क्लोजर रिपोर्ट के तथ्यों पर गौर करने के बाद माना कि इसमें पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने इस रिपोर्ट को चार्जशीट मानकर तलवार दंपति पर आरोप तय कर दिए, जिसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।

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इससे पहले भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कडे़ इंतजाम किए थे। दोपहर बाद करीब सवा 3 बजे मामले में सुनवाई शुरू हुई और कुछ देर बाद ही अदालत ने फैसला सुना दिया। तलवार दंपति के परिजनों और बचाव पक्ष के वकील ने फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

वहीं, सीबीआई के वकील ने फैसले को सही बताते हुए इसका स्वागत किया है। मामले में पहले गिरफ्तार किए गए तीन नौकरों में से एक के वकील ने भी कहा कि कोर्ट का फैसला सही है। इससे साफ हो गया है कि नौकरों को फंसाने की कोशिश की गई थी।
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