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आरुषि हत्याकांड: सीबीआई नहीं करेगी अब फांसी की मांग

Thu, 28 Nov 2013 01:05 AM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 28 Nov 2013 01:05 AM IST
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aarushi murder case cbi rajesh talwar nupur death sentence

बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के मामले में विशेष अदालत की ओर से तलवार दंपति के लिए मुकर्रर की गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ सीबीआई अपील नहीं करेगी।

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यानी जांच एजेंसी अब इस सनसनीखेज हत्याकांड के दोषी दंत चिकित्सक राजेश व नूपुर तलवार के लिए मृत्युदंड की मांग नहीं करेगी। विशेष अदालत के फैसले पर गौर करने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने यह निर्णय लिया है।
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सीबीआई के एक विधि अधिकारी के मुताबिक विशेष अदालत ने फैसले में इसे जघन्यतम अपराध की श्रेणी का मानने से इंकार किया है। क्योंकि जघन्यतम अपराध के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में इसका दायरा तय किया गया है।
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फैसले में कोर्ट ने यह साफ भी किया है कि तलवार दंपति समाज के लिए किसी तरह का खतरा नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी की ओर से जिन आधारों पर मौत की सजा की मांग तलवार दंपति के लिए की गई थी। उन्हें नकारते हुए सीबीआई कोर्ट ने उनके जवाब भी दिए हैं।

ऐसे में ताउम्र जेल में ही रहने की सजा देने के खिलाफ एजेंसी का अपील करने का कोई इरादा नहीं है। क्योंकि फैसले के खिलाफ अपील में जाने पर हाईकोर्ट यह सवाल जरूर उठाएगी कि जब सीबीआई अदालत ने मृत्युदंड न देने के कारण स्पष्ट किए हैं तो फिर एजेंसी इसे जघन्यतम अपराध क्यों मानती है।

विधि अधिकारी ने कहा कि ऐसे में इस मामले को जघन्यतम श्रेणी का करार देने की दलीलें एजेंसी के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं और तलवार दंपति के पक्ष में भी जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि मृत्युदंड की मांग के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर एजेंसी के जांच और विधि अधिकारी एकमत नहीं हैं।

ऐसे में अभी तो एजेंसी का निर्णय यही है कि वह फांसी की मांग को लेकर वह आगे नहीं जाएगी। हालांकि इस बारे में अभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं से राय-मशविरा भी किया जाएगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


गौरतलब है कि मंगलवार को गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही डॉ. राजेश पर 17 हजार और नूपुर पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

क्या रहेगा एजेंसी का रुख
जब तलवार दंपति निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे तो सीबीआई इस पर जोर देगी कि उनकी सजा को ऊपरी अदालतें न घटाएं। चूंकि इस मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य कोई नहीं है और स्थितिपूर्ण साक्ष्य के आधार पर अभियोजन ने पूरी मर्डर मिस्ट्री अदालत के समक्ष रखी। उसे बरकरार रखने और हाईकोर्ट की नजर में उसे सटीक ठहराना ही अब एजेंसी का मकसद रहेगा।

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