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अनाथ बच्चियों को अपनाती है आरती, गरीब मां बनी मिसाल

Sat, 21 Mar 2015 11:56 AM IST
विकास शुक्ला/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
विकास शुक्ला/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी Updated Sat, 21 Mar 2015 11:56 AM IST
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aarti mother took home orphans.

पास के एक मैदान में एक मासूम बच्ची बिलख रही थी। उसे नहीं पता था कि वह कहां से आ गई और उसके मां-बाप कहां चले गए। आरती ने उसे गोद में लिया और अपना बना लिया। इस बच्ची का नाम करुणा है जो अब नौ साल की हो चुकी है। करुणा देख नहीं सकती।

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आरती का परिवार और बड़ा हो गया। तीन उसकी खुद की और चार ऐसी हैं जिन्हें उनके मां-बाप छोड़कर चले गए। 14 साल की सुचित्रा और 15 साल की सुमित्रा भी हैं, जो उन्हें रेलवे प्लेटफार्म पर मिलीं। इनमें सुचित्रा न बोल सकती है और न ही सुन सकती है।
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इस परिवार को दो साल पहले एक और बच्ची सूफिया मिली जो न बोल सकती है और न ही सुन सकती है। उन्होंने सुचित्रा और सूफिया का दाखिला सरकारी मूक बधिर स्कूल में करा दिया है।
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आरती बनी मिसाल

aarti mother took home orphans.

लखीमपुर खीरी के निर्मलनगर हाथीपुर उत्तरी में रहने वाली आरती आसपास के घरों में चौका-बर्तन कर दो जून की रोटी जुटाती हैं। अपनी बेटियों को भूखा नहीं सोने देती। मोहल्ले के ही राधेश्याम कहते हैं आज लोग लड़कों के लिए कितनी मन्नतें करते हैं और मंदिरों-मस्जिदों की चौखटों पर माथा टेकते हैं।

देहात की अनपढ़ आरती अनचाही बेटियों को अपना कर अपने आप में मिसाल बन गई है। वह खुद भी मेहनत मजूरी कर उनका खर्च चलाती है। आरती के इस जज्बे के आगे उसके पति भी ने भी समझौता कर लिया। उनके पेंटर पति बाबू कहते हैं, आरती  अनाथ को अपना लेती है। मैं उसके इस जज्बे की कद्र करता हूं। हम इन्हें कैसे पालेंगे इसकी चिंता नहीं करते। थोड़ी मेहनत और कर लेंगे पर इन्हें इनके सपने पूरे करने के हर साधन मुहैया कराएंगे।

आरती का कहना है कि मेरी अपनी भी तीन बेटियां हैं बावजूद इसके मैं जब भी अनाथ बच्चियों को देखती है तो उसे अपना लेती हूं। मुझे इस बात का चिंता नहीं होती कि उन्हें कैसे पालूंगी।

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