केजरी के 20 लड़ाके, किसमें कितना है दम?
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दिल्ली में 49 दिन सरकार चलाने वाली आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सत्ता से बाहर होते ही सारा ध्यान लोकसभा चुनावों पर लगा दिया है। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के सिर्फ दो दिन बाद आम चुनावों के लिए संभावित उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी गई।
इस फेहरिस्त में पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के नाम हैं, लेकिन इनमें अरविंद केजरीवाल शामिल नहीं हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वो भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
लेकिन आम आदमी पार्टी की इस लिस्ट ने कई दिग्गज नेताओं की नींद उड़ा दी होगी, क्योंकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने सबसे पहला निशाना बड़े नामों पर लगाया है। आइए देखें कि लोकसभा चुनावों की जंग को दिलचस्प बनाने वाले इस नए राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवारों के जरिए कौन-कौन से बड़े नेताओं को लपेटने की कोशिश की है।
अमेठी में राहुल को चुनौती देंगे कुमार विश्वास
इसकी संभावना काफी पहले से थी, लेकिन अब औपचारिक ऐलान भी हो गया है। कवि से नेता बने कुमार विश्वास बीते कई दिनों से अमेठी में बने हुए हैं और वो चुनौती देंगे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को।
कुमार अपने विवादित बयानों को लेकर फंसते रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ कि गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में किसी ने राहुल को गंभीर चुनौती देने का फैसला किया हो।
आम आदमी पार्टी उम्मीद कर रही है कि कुमार विश्वास के जरिए उस विरासत की राजनीति पर हमला कर पाएगी, इसकी नुमाइंदगी कथित तौर पर राहुल गांधी करते हैं।
चांदनी चौक पर भिड़ेंगे सिब्बल-आशुतोष
चांदनी चौक से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल को इस बार आम आदमी पार्टी की नई चुनौती का सामना करना होगा। और उनके सामने होंगे पत्रकारिता में कई साल गुजारने के बाद सियासत में उतरने वाले आशुतोष।
दिल्ली की इस सीट पर यूं तो हमेशा से खास निगाह रहती है, लेकिन इस बार मामला दिलचस्प है क्योंकि जंग तीन-तरफा होने जा रही है। सिब्बल कांग्रेस के मजबूत दावेदार हैं और हालिया वक्त में आशुतोष ने तेजी से राजनीति में अपनी जगह बनाई है।
कांग्रेस पहले ही साफ कर चुकी है कि अगर अरविंद केजरीवाल लड़ते हैं, तो भी सिब्बल चांदनी चौक से खड़े होंगे। लेकिन आम आदमी पार्टी ने आशुतोष के रूप में नया दांव खेला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस सीट से किसे दावेदार बनाती है। 2009 में भाजपा के विजेंद्र गुप्ता यहां हार गए थे, जो हाल में अरविंद केजरीवाल और शीला दीक्षित के बाद नई दिल्ली विधानसभा सीट पर तीसरे पायदान पर रहे।
चिदंबरम पर जूता, महाबल को चुनौती
राजधानी की पश्चिमी दिल्ली सीट पर भी इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर फिलहाल कांग्रेसी सांसद महाबल मिश्रा विराजते हैं, जो ठीक-ठाक कद रखते हैं।
लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस सीट को दिलचस्प बना दिया है। उसने जरनैल सिंह नामक पूर्व पत्रकार को टिकट दिया है, जो वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर जूता उछालकर सुर्खियों में आए थे। इसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था।
जरनैल ने इस अवसर पर कहा, "मैंने पश्चिम दिल्ली सीट से टिकट के लिए आवेदन किया था और मुझे जानकारी दी गई है कि मेरा चयन हो गया है।" जूता फेंकने वाली घटना पर उन्होंने कहा, "वो उन्हें लगा नहीं था, सिर्फ एक सांकेतिक विरोध था।"
मुलायम को बाबा की चुनौती
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े नेताओं में शुमार मुलायम सिंह यादव को चुनौती देने के लिए आम आदमी पार्टी ने बाबा हरदेव सिंह को चुना है। 65 वर्षीय सिंह को अलीगढ़ के लोग बाबा कहते हैं।
फिलॉसफी में पीएचडी और एमबीए कर चुके सिंह ने 34 साल की अपनी सर्विस में कई बार नेताओं से मुकाबला किया है। वह मुलायम से पहले भी भिड़ चुके हैं। 2005 में यूपी स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी के रूप में उन्होंने घाटे में चलने वाली चीनी मिलों को फायदे में ला दिया था। और मुलायम सिंह के आदेश को दरकिनार किया।
इसी साल उन्होंने आरटीआई का इस्तेमाल का मुलायम सिंह यादव को निचले काडर के अधिकारियों को आईएएस में प्रमोट करने से जुड़ा कदम उठाने से रोक दिया था। 2007 में रिटायरमेंट के बाद वह आरएलडी से जुड़े और प्रदेश अध्यक्ष बने। 2012 में विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
गुड़गांव में योगेंद्र यादव ने बढ़ाई गर्मी
आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा में मिली धमाकेदार जीत के पीछे अगर अरविंद केजरीवाल का करिश्मा था, तो दिमाग था पार्टी के 'चाणक्य' योगेंद्र यादव का। यह चाणक्य अब चुनावी महाभारत में कूद गए हैं।
योगेंद्र यादव के नाम का ऐलान गुड़गांव से किया गया है। यहां से पिछले चुनावों में कांग्रेस के राव इंद्रजीत सिंह को जीत मिली थी, जो हाल में भाजपा में शामिल हुए हैं।
इसके अलावा कांग्रेस की तरफ से अभी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि सिने तारिका शर्मिला टेगोर को यहां से उतारा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इस सीट पर दिग्गज और ग्लैमर, दोनों तड़के देखने को मिलेंगे।
नागपुर में नितिन के सामने अंजलि
आम आदमी पार्टी ने भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी पर पहले भी निशाना साधा और आगामी लोकसभा चुनावों में उनके सिर में दर्द करती रहेगी। वजह यह है कि आखिरकार पार्टी ने फैसला कर लिया है कि उनके खिलाफ अपनी बड़ी नेता को खड़ा करना है।
काफी पसोपेश के बाद यह साफ कर दिया गया है कि नितिन गडकरी के खिलाफ नागपुर सीट से महाराष्ट्र यूनिट की संयोजक अंजलि दमानिया ही मुकाबला करेंगी। गडकरी को तैयारियां तेज करनी होंगी।
कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वह कांग्रेस की तुलना में गडकरी को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं। और अगर वो नहीं जीत पातीं, तो भी गडकरी को हार की तरफ धकेल सकती हैं, जो पार्टी का उद्देश्य है।
मुंबई में AAP ने खेला मेधा पाटकर कार्ड
आम आदमी पार्टी ने नर्मदा बचाओ आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर को मुंबई की उत्तर-पूर्व सीट से टिकट देने का फैसला किया है, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं।
यह सीट फिलहाल एनसीपी के सांसद संजय दिना पटेल के पास है। पिछले महीने मेधा पाटेकर ने कहा था कि वह आम आदमी पार्टी का खुलकर समर्थन करेंगी। उस वक्त उनका दावा था कि वह बाहर से समर्थन देंगी।
वह झुग्गीवासियों के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनकर इस इलाके में काफी वक्त से काम कर रही हैं। यहां झुग्गी-झोपड़ी काफी ज्यादा हैं और मतदाताओं में गुजराती, मराठी और दलित आबादी है।
मिलिंद के सामने मीरा सान्याल
मुंबई में एक और सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। बैंकर और रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड की पूर्व चेयरपर्सन मीरा सान्याल को आगामी चुनावों में दक्षिणी मुंबई से टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेसी सांसद मिलिंद देवड़ा से होगा।
पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य मयंक गांधी के लिए भी सीट तय कर दी है। वह मुंबई की नॉर्थ वेस्ट सीट सये गुरुदास कामत से दो-दो हाथ करेंगे। इसके अलावा पूर्व नौकरशाह विजय पंधारे नासिक से पार्टी उम्मीदवार होंगे और पीडब्ल्यू मंत्री एवं एनसीपी नेता छगन भुजबल को चुनौती देंगे।
आप की महाराष्ट्र इकाई की सचिव प्रीति शर्मा मेनन ने कहा, "हमने महाराष्ट्र से तीन उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं। राज्य के लिए 30 और उम्मीदवारों की लिस्ट जल्द जारी की जाएगी।"
सलमान खुर्शीद के लिए नई मुसीबत
केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के लिए भी आम आदमी पार्टी ने मुसीबत खड़ी कर दी है। उनके खिलाफ मुकुल त्रिपाठी को उतारा गया है। रिटायर्ड जज के बेटे मुकुल एक एक्सिडेंट के बाद कई महीने बिस्तर पर गुजार चुके हैं, लेकिन उम्मीद नहीं हारे।
उन्हें एमबीबीएस बीच में छोड़ना पड़ी, लेकिन 1998 में वह पत्रकारिता से जुड़े और 15 साल कई अखबारों के लिए काम किया। इसके अलावा मेरठ यूनिवर्सिटी से लॉ में पोस्ट ग्रेजुएट सोमेंद्र ढाका आरएलडी के अजित सिंह के लिए चुनौती खड़ी करेंगे।
उन्हें 2003 में बागपत बार एसोसिएशन का सबसे युवा अध्यक्ष चुना गया था। वह अन्ना के जनलोकपाल आंदोलन से जुड़े और बाद में आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य बने।
सिख पीड़ितों का चेहरा लुधियाना से
आम आदमी पार्टी ने लुधियाना से सिख कार्ड खेला और जिम्मा सौंपा गया ऐसे शख्स को जो दिल्ली में सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए लड़ने वाले वकील के तौर पर देखा जाता है। आम आदमी पार्टी के टिकट पर लुधियाना से वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
इसके अलावा भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरी अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में फंसे सुरेश कलमाड़ी के विरोधी पर भी खास ध्यान दिया है।
आम आदमी पार्टी ने कलमाड़ी के खिलाफ सुभाष वारे को उतारा है। सामाजिक कार्यकर्ता को कांग्रेस और भाजपा की चुनौती से भिड़ना है, जो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। हालांकि, अभी मावल, बारामती और शिरूर सीटों को लेकर सस्पेंस रखा गया है।
नर्मदा बचाओ के आलोक खंडवा से
नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रमुख आलोक अग्रवाल आम आदमी पार्टी के टिकट पर खंडवा लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेंगे। साल 2009 में यहां कांग्रेस के अरुण सुभाष यादव जीते थे और इससे पहले चार चुनावों में जीत भाजपा के हाथ आई थी।
अग्रवाल ने इसका इशारा पहले कर दिया था, "मैंने खंडवा से चुनाव लड़ने का आवेदान किया था। अगर पार्टी मुझे टिकट देती हे, तो मैं चुनाव लड़ूंगा। हम धार और खरगोन लोकसभा सीट से भी लोगों को नामित करने पर विचार कर रहे हैं।"
उनका कहना है कि कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने नर्मदा घाटी के लोगों से काफी खराब व्यवहार किया है। वैसे भी नर्मदा बचाओ आंदोलन ने आगामी चुनावों में आम आदमी पार्टी को पूरा समर्थन देने की बात कही है।