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दिल्ली में बस आप ही आप, बाकी सबका सूपड़ा साफ

Tue, 10 Feb 2015 06:50 PM IST
Updated Tue, 10 Feb 2015 06:50 PM IST
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aap landslide victory in the delhi assembly polls

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता से बहुमत मांगा था लेकिन उन्होंने लगभग पूरी की पूरी विधानसभा ही उन्हें सौंप दी। चुनावी विश्लेषकों के कयास और एग्जिट पोल के आंकडे़ एक बार गलत साबित हुए। उन्होंने आप की जीत का अंदाजा तो लगाया था, लेकिन उस आंकड़े के करीब भी नहीं पहुंच पाए जो ईवीएम के पिटारे से निकल कर बाहर आए।

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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में 67 सीट पर जीत दर्ज की है। भाजपा के हिस्से बस तीन सीटें आई हैं।

आप की आंधी में कांग्रेस जड़ समेत उखड़ गई है। पिछले विधानसभा चुनावों में दिल्ली की सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस इस चुनाव में विधानसभा से ही बाहर हो गई। कांग्रेस का एक भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर पाया है। केजरीवाल के झाड़ू ने भाजपा की भी तगड़ी सफाई की है। पार्टी के कई दिग्गज नेता विधानसभा चुनावों में औंधे मुंह गिरे हैं, महज 25 दिन पहले राजनीति में आईं भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी अपनी सीट तक नहीं बचा पाईं।
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आप ने पाई 67 सीटें, कांग्रेस शून्य

aap landslide victory in the delhi assembly polls

‌‌दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 54 फीसदी से ‌अधिक वोट ह‌ासिल‌ किए हैं। दूसरे स्‍थान पर आई भाजपा को 32.2 फीसदी वोट मिले हैं। वोट प्रतिशत के मामले में कांग्रेस तीसरे नंबर पर है। उसे 9.7 फीसदी वोट मिले हैं, लेकिन सीटें एक भी नहीं मिली है।

पिछले चुनावों में भाजपा ने लगभग 33 और आप ने 30 फीसदी वोट पाए थे, और कांग्रेस ने 25 फीसदी के आस-पास वोट पाए थे, लेकिन इस चुनावों में पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, द‌‌क्षिणी और मध्य, दिल्ली हर हिस्से के लोगों ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया है।

पार्टी ने दिल्ली की सभी 12 सुरक्षित सीटों पर जीत दर्ज कर यह संदेश भी दे दिया है कि उसने समाज के हर तबके में पैठ बना ली है। पिछली बार 12 सुरक्षित सीटों में से आप 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर भी आप के ही खाते में ही दर्ज हुई हैं।

भाजपा सभी दिग्गज हुए धराशायी

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पिछले विधानसभा चुनावों में 31 सीटें पाकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा इन चुनावों में औंधे मुंह गिरी है। लगभग 16 सालों से दिल्‍ली की सत्ता से बाहर भाजपा ने इस बार दिल्ली में सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा दिया था।

भाजपा आलाकमान ने प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र 12 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्यों के मुख्ममंत्री, 120 सांसदों, और एक लाख से अधिक आरएसएस कार्यकर्ताओं को उतारा था। अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता की काट के तौर पर पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को तुरुप के पत्‍ते के तौर पर सामने लाया गया था।

हालांकि भाजपा का एक भी टोटका काम नहीं आया। पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों से भी कम वोट पाए और सीटों के मामले में दिल्ली विधानसभा में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया। भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं, और आप  के एसके बग्गा से हार गईं।

भाजपा नेता हर्षवर्धन पांच बार उस सीट से विधायक चुने गए थे। कृष्‍णानगर को सबसे सुर‌क्षित सीट मानकर बेदी को उतारा गया था। 6 बार विधायक रहे जगदीश मुखी भी अपनी सीट नहीं बचा पाए और जनकपुरी सीट से आप के राजेश ‌ऋषि से 25 हजार से अधिक वोटों से हार गए।

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कांग्रेस विधानसभा से ही बाहर हो गई

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महज 15 महीनों पहले तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस इस बार विधानसभा की दहलीज पर भी पैर नहीं रख पाएगी। दिल्ली की जनता ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ कर दिया है। चुनावों के ऐन पहले केंद्रीय नेतृत्व ने अजय माकन को दिल्ली में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी थीं। पूर्व सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को भी टिकट दिया गया था। दिल्ली में वापसी के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जमकर रोड शो किया था। हालांकि ‌दिल्ली की जनता ने कांग्रेस को एक बार फिर खारिज कर दिया।

कांग्रेस को दिल्‍ली विधानसभा चुनावों में महज 9.7 फीसदी वोट ‌हासिल हुए हैं और सीटें शून्य। कांग्रेस के सभी दिग्गज धराशायी हो गए।‌ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का चेहरा बनाए गए अजय माकन सदर बाजार सीट पर तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें मात्र 16331 वोट हासिल हुए, जबकि उस सीट पर जीते आप के सोमदत्त ने 67507 वोट पाए। पिछले बार जीते हारून यूसुफ भी बल्ली मारान से हार गए। पूर्व सांसद महाबल मिश्रा भी अपनी सीट नहीं बचा पाए।

किरण वालिया, एके वालिया, योगानंद शास्‍त्री और शोएब इकबाल जैसे कांग्रेस के सभी ‌दिग्गज चुनाव हार गए।

दलबदलुओं को दिखाया बाहर का रास्ता

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चुनावों से ऐन पहले दल बदलने वालों को भी दिल्‍ली की जनता ने खूब सबक सिखाया है।

यूपीए सरकार में मंत्री, कांग्रेस से सांसद, विधायक और शीला सरकार में मंत्री रही कृष्‍णा तीरथ ने चंद दिनों पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं ‌थी। भाजपा ने उन्हें पटेलनगर से टिकट दिया था, हालांकि पटेलनगर के मतदाताओं को ना भाजपा का फैसला पसंद आया ना कृष्‍णा तीरथ। पटेलनगर सीट पर कृष्‍णा तीरथ आप के हजारी लाल से 34 हजार से अधिक वोटों से हार गईं।

भाजपा के टिकट पर खड़े आप के पूर्व विधायक ‌विनोद कुमार बिन्नी आप के मनीष सिसोदिया से 28761 वोटों से हार गए। पिछली बार आप के टिकट पर जीते और इस बार भाजपा के टिकट पर खड़े एमएस धीर जंगपुरा से आप के प्रवीण कुमार ने 20450 वोटों से हार गए।

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