केजरीवाल के चहेतों को तोहफा, बिजली बिल होंगे आधे
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बिजली-पानी जैसे जनसरोकार से जुड़े मुद्दों से राजनीति शुरू कर दिल्ली के तख्त पर बैठने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को उन समर्थकों के हित में बिजली बिल कम करने की घोषणा की, जो शीला सरकार के कार्यकाल में बिलों में अनियमितता से जुड़े केजरीवाल के आंदोलन में शामिल थे।
इस घोषणा के मुताबिक हजारों दिल्लीवासियों के बिजली के बिल 50 फीसदी तक कम होंगे, साथ ही उन्हें पेनल्टी भी नहीं देनी होगी। यह कमी रिकॉर्डतोड़ है। बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।
शीला सरकार के खिलाफ मोर्चा
दिल्ली में निजी बिजली कंपनियों की तरफ से ग्राहकों को बढ़े हुए बिजली बिल भेजने के बाद आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने शीला सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
अक्टूबर, 2012 से पिछले साल अप्रैल तक उन्होंने शीला सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़े रखा और दिल्ली के लोगों से बढ़े हुए बिल जमा ना करने की अपील की। जाहिर है इस आंदोलन का फायदा केजरीवाल को दिल्ली विधानसभा चुनावों में मिला।
केजरीवाल का बिजली बम
अरविंद केजरीवाल ने ये भी कहा था कि यदि उनके बिल गलत हैं, तो उनके बदले भुगतान न किया जाए। इस आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने अपने बिल नहीं जमा कराए थे, अब उन लोगों को दिल्ली सरकार की ओर से बिजली बिलों में 50 फीसदी तक की कमी का तोहफा मिलेगा।
साथ ही उनके खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे भी वापस लिए जाएंगे।
दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक के बाद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इसके अलावा इन उपभोक्ताओं के बिलों पर लगाई गई पेनल्टी भी माफ करने का फैसला हुआ है। केजरीवाल सरकार के इस कदम से जहां दिल्ली के करीब 23 हजार उपभोक्ताओं को फायदा भी होगा, वहीं सरकारी खजाने पर करोड़ों का बोझ पड़ने की आशंका है।
चुनाव से पहले किए वादे किए पूरे
वहीं, केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आने के बाद चुनावों से पूर्व अपने वोटरों से किया गया बिजली के बिलों में कमी का वादा भी पूरा किया। इसमें सरकार ने दिल्लीवासियों के 400 यूनिट तक के बिल में 50 फीसदी तक कम कर दिए थे। हालांकि, ऐसा सब्सिडी के जरिए किया गया।
इसके बाद दिल्ली सरकार ने कैग को दिल्ली में बिजली सप्लाई कर रही तीनों निजी बिजली कंपनियों के खातों की ऑडिट करने के आदेश भी दिए थे। शुरुआत में कहा गया है कि यह मामला अदालत में इसलिए इस पर कदम न बढ़ाए जाएं, लेकिन केजरीवाल ने कानूनी सलाहकारों से बातचीत के बाद इस दिशा में भी कदम उठा दिया था।