फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   aam aadmi party challenge to cut electricity price

केजरी का पहला वादा पूरा, दूसरे में फंसा पेंच!

Tue, 31 Dec 2013 11:29 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 31 Dec 2013 11:29 AM IST
विज्ञापन
aam aadmi party challenge to cut electricity price

आम आदमी पार्टी ने प्रति माह 20 हजार लीटर पानी मुफ्त देने का अपना वादा तो पूरा कर दिया लेकिन सबसे बड़ा वादा बिजली कीमतों में 50 फीसदी कमी लाना है।

विज्ञापन


सरकार बनने के बाद से ऊर्जा विभाग के अधिकारी इसके लिए माथापच्ची कर रहे हैं लेकिन अभी भी फौरी तौर पर सब्सिडी के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन


पढ़ें, केजरीवाल का न्यू ईयर गिफ्ट, दिल्ली में पानी मुफ्त!
विज्ञापन
विज्ञापन


लिहाजा स्लैब आधारित सब्सिडी पर विचार किया जा रहा है। बिजली कीमत पर अभी तक सरकार की ओर से दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) से संपर्क नहीं साधा गया है।

दाम तय करने का अधिकार
यदि सरकार संपर्क करती है तब भी आयोग को इस पर अंतिम फैसला लेने में कम से कम तीन माह का समय लगेगा। हालांकि दाम तय करने का पूरा अधिकार आयोग के पास है।

सूत्रों के अनुसार बिजली बिल में कमी लाने का फिलहाल एक मात्र विकल्प सब्सिडी है। इसके लिए अधिकारी विकल्प तलाश रहे हैं।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बिजली के घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी लाने के लिए एक रोड मैप तैयार किया है।

लेकिन शायद ही यह रोडमैप मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पसंद आए, क्योंकि तैयारी के मुताबिक सभी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 50 फीसदी की कमी नहीं हो पा रही है।

सूत्रों का कहना है ऊर्जा विभाग ने 0-200 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 50 फीसदी की सब्सिडी देने की बात कही है जबकि 201-400 यूनिट तक बिजली खपत करने वालों को 25 फीसदी की सब्सिडी दी जाए।

अभी तक 0-200 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सरकार प्रति यूनिट 1.20 रुपये की सब्सिडी जबकि 201 से 400 यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 80 पैसे की सब्सिडी देती है।

करीब 45 फीसदी आबादी 0-200 यूनिट बिजली खर्च करती है जबकि दिल्ली की 70 फीसदी आबादी 400 यूनिट तक बिजली खर्च करती है। तीनों डिस्कॉम्स को मिलाकर दल्ली में करीब 40 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं।

तीन माह से पहले नहीं
भले ही अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को पचास फीसदी सस्ती बिजली देने का वादा किया हो।

भले ही मुख्यमंत्री ने आला अधिकारियों से इस वादे को पूरा करने का रास्ता जल्द से जल्द निकालने को कहा हो, मगर तीन माह से पहले बिजली के दामों में कमी आना मुमकिन नहीं दिखता।

कुछ ऐसा कहना है दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) के चेयरमैन पी.डी.सुधाकर का।

सुधाकर ने कहा कि अभी तक दिल्ली सरकार की ओर से बिजली कीमत कम करने के संबंध में कुछ नहीं कहा गया है। हम बिजली की मौजूदा कीमतों की समीक्षा नहीं कर रहे हैं।


मगर कीमतों की समीक्षा करने में कम से कम तीन माह का समय लग सकता है। दाम के बारे में कोई भी फैसला लेने से पहले तीनों बिजली कंपनियों के साथ-साथ बाकी के शेयर होल्डर से भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

दूसरी ओर डिस्कॉम्स का कहना है कि निजीकरण के बाद थोक बिजली खरीद के दामों में 300 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि उपभोक्ताओं से जो कीमत ली जा रही है उसमें 70 फीसदी का ही इजाफा हुआ है।

डिस्कॉम्स को लाइसेंस देना या रद्द करना अथवा कीमत तय करने का अधिकार आयोग के पास ही है।

शेयर होल्डर होने के नाते दिल्ली सरकार अपनी राय आयोग के समक्ष रख सकती है और उनकी राय पर आयोग विचार भी करता है। सीएजी ऑडिट के लिए आयोग ने भी कहा है, लेकिन फिलहाल यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed