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हाईटेक ‘आकाश’ से उड़ान भरेगी हिंदी
आगरा/रैना पालीवाल
Updated Fri, 09 Nov 2012 08:05 AM IST
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कंप्यूटर का एक बटन दबाया और हिंदी की पाठ्यसामग्री आपके सामने। यह सपना नहीं, हकीकत है। केंद्रीय हिंदी संस्थान हिंदी को हाईटेक आकाश देने जा रहा है। संस्थान के सूचना व भाषा प्रौद्योगिकी विभाग की परियोजना ‘हमारी हिंदी हमारा आकाश’ हिंदी को तकनीकी क्षेत्र में नये आयाम देगी।
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छात्रों के बैग का बोझ कम होगा और वे सेटेलाइट के जरिये हिंदी की शिक्षा प्राप्त करेंगे। वहीं दूसरी परियोजना ‘निकश’ से हिंदी सीखने को भारत आने वाले विदेशियों की कसौटी होगी। इन परियोजनाओं का प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा गया है।
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आकाश में खास :
-सेटेलाइट से कनेक्ट होगी हिंदी की समस्त पाठ्यसामग्री। इसके लिये विभाग एक साफ्टवेयर तैयार करेगा।
मल्टीमीडिया शिक्षण
-पाठ्यक्रमों का निर्माण, नवीनीकरण, स्वदेशी व विदेशी शैक्षिक सामग्री का निर्माण।
-विदेशी प्रवासी भारतीयों के लिये शिक्षण सामग्री।
-पारंगत, प्रवीण, ग्रहण, निश्रा पाठ्यक्रम का अनके केंद्रों पर विस्तार।
-फंक्शनल हिंदी, एप्लाइड लिंग्विस्टिक के कोर्स तैयार किये जाएंगे।
-मल्टीमीडिया आधारित पापुलर कल्चर, सीडी निर्माण।
-प्रशिक्षण, हिंदी साहित्यकारों पर फिल्म निर्माण।
-साक्षरता, यूनीकोड में चीजों को उपलब्ध कराना।
-ई बुक, अध्येता कोष।
-नार्थ ईस्ट हिंदी टीचर्स के लिये फास्ट ट्रैक हिंदी शिक्षण होगा।
-बेब पोर्टल तैयार करना।
-शिक्षा, पर्यावरण, समाजशास्त्र की किताबों को हिंदी में तैयार करना।
-बहुभाषी पोर्टल पर एनसाइक्लोपीडिया, लघु कोष, त्वरित कोष, हिंदी भाषा, लोक भाषा कोश तैयार करना।
निकश में खास:
हिंदी सीखने के लिये भारत आने वाले विदेशियों को निकश (नेशनल एंड इंटरनेशनल नॉलेज एक्रीडिएशन स्टैंडर्ड फार हिंदी) की आन लाइन परीक्षा पास करनी होगी। भाषा के चारों कौशल पढ़ना, लिखना, बोलना, सुनना पर खरा उतरना होगा।
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पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री और संस्थान अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने जोहांसबर्ग में हुए नौवें हिंदी सम्मेलन के तकनीकी सत्र में हिंदी को ग्लोबल बनाने पर चर्चा की थी। पूर्व अध्यक्ष की उम्मीदें, उपाध्यक्ष अशोक चक्रधर का विजन, निदेशक आनंद मोहन की सक्रियता, कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी की जागरूकता से विभाग ने परियोजना का प्रारूप तैयार किया।