एयरफोर्स में शामिल हुई आकाश मिसाइल, पर्रिकर ने किया समर्पित
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पहली स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली आकाश मिसाइल भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गई है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को ग्वालियर एयरबेस पर आयोजित एक कार्यक्रम में शक्तिशाली स्वदेशी आकाश मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली भारतीय वायुसेना को समर्पित किया।
रक्षा मंत्री पर्रिकर ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा कि स्वदेश में ही अत्याधुनिक और शक्तिशाली आकाश मिसाइल सिस्टम तैयार कर भारत ने मेक इन इंडिया की तरफ सफल कदम बढ़ाया है। उन्होंने डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड सहित आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्माण से जुड़ीं अन्य सहयोगी कंपनियों के अथक प्रयासों के लिये शुभकामनाएं भी दीं।
पर्रिकर ने वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल अरूप राहा को प्रतीकात्मक रूप से चाबी सौंपकर आकाश मिसाइल सिस्टम वायुसेना को समर्पित किया। इससे पहले भारतीयय इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एसके शर्मा ने रक्षा मंत्री को आकाश मिसाइल की चाबी प्रदान की।
'आकाश मिसाइल मेक इन इंडिया की कड़ी'
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेश में ही आकाश मिसाइल सिस्टम का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का उत्कृष्ट उदाहरण है। सरकार और सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी से बहुत ही कम लागत में इस शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली का निर्माण एक अध्ययन का विषय भी है।
उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के लगभग 95 प्रतिशत पुर्जे भारत में ही तैयार किए गए हैं। इस प्रकार मेक इन इंडिया की लक्ष्य प्राप्ति में यह स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली एक कड़ी के रूप में जुड़ी है।
उन्होंने कहा आकाश मिसाइल सिस्टम के द्वितीय चरण पर भी तेजी से काम चल रहा है। अगले दो-तीन साल में आकाश मिसाइल सिस्टम-2 भी वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा केवल रक्षा संबंधी तकनीक ही नहीं, अपितु आम आदमी की भलाई के लिए भी नई-नई तकनीक ईजाद की जा रही है। हमारी मंशा है कि इस तकनीक का लाभ आम आदमी तक पहुंचे।
वायुसेना अध्यक्ष ने की तारीफ
वायुसेना अध्यक्ष अरूप राहा ने कहा कि आकाश मिसाइल सिस्टम से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ी है। यह विभिन्न परिस्थितियों में अचूक व सफल मारक क्षमता वाली मिसाइल है। शुरुआत में भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड के सीएमडी एसके शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में आकाश मिसाइल सिस्टम के पहले प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. प्रहलाद ने भी विचार व्यक्त किए।
उल्लेखनीय है कि आकाश मिसाइल सिस्टम की डिजायन और तकनीक डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई है। भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने नोडल एजेंसी के रूप में अन्य सहयोगी कंपनियों के साथ इस मिसाइल का एकीकरण (निर्माण) किया है।
इस मौके पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री माया सिंह, महापौर विवेक नारायण शेजवलकर, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक डॉ. एस. क्रस्टिफर, आकाश मिसाइल प्रणाली के पहले परियोजना निदेशक डॉ. प्रहलाद सहित वायुसेना के सेंट्रल एयर कमांड के एयर मार्शल केएस गिल, महाराजपुरा एयरबेस के एयर कमोडोर एचएस बसरा आदि मौजूद थे।
रक्षा संबंधी उत्पादों की जानकारी ली
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा अनुसंधान तथा विकास स्थापना (डीआरडीई) का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने डीआरडीई में रक्षा संबंधी उत्पादों सहित अन्य उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। डीआरडीई ग्वालियर के वैज्ञानिकों के साथ संक्षिप्त बैठक में रक्षा मंत्री को डीआरडीई ग्वालियर में चल रहे अनुसंधान प्रोजेक्टों की विस्तृत जानकारी दी गई।
रक्षामंत्री ने संबंधित वैज्ञानिकों से उनके प्रोजेक्ट के बारे में प्रश्न भी पूछे, जो ज्यादातर उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी की कार्यप्रणाली से संबंधित थे। इसके तुरंत बाद रक्षामंत्री ने डीआरडीई ग्वालियर द्वारा विकसित उत्पादों का मुआयना किया तथा प्रत्येक उत्पाद की कार्यप्रणाली के बारे में संबंधित वैज्ञानिक से प्रश्न पूछे।
रक्षामंत्री पर्रिकर ने कुछ उत्पादों को जनसुलभ बनाने एवं उनकी लागत को कम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उत्पादों की प्रदर्शनी के दौरान ही रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ मुख्यालय द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन भी किया।
अंत में अपनी टिप्पणी में रक्षामंत्री ने डीआरडीई ग्वालियर की कार्यप्रणाली की प्रशंसा कर कहा कि डीआरडीई ग्वालियर के वैज्ञानिकों की टीम अपने कार्य में दक्ष एवं तत्पर है। इससे पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर सुबह डीआरडीई पहुंचे। वहां उनका स्वागत सचिव रक्षा अनुसंधान तथा अनुसंधान विभाग एवं महानिदेशक डीआरडीओ डॉ. एस. क्रिस्टोफर, महानिदेशक जैवविज्ञान डॉ. मानस के. मंडल और ग्वालियर डीआरडीई के निदेशक डॉ. लोकेंद्र सिंह ने किया।
लड़ाकू विमानों का निरीक्षण भी किया
महाराजपुरा स्थित एयरबेस पर आज रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने महाराजपुरा एयरबेस पर तैनात लड़ाकू विमानों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने मिराज, सुखोई, मिग सहित अवाक्स और एयर टू एयर रिफ्युलिंग सिस्टम का भी निरीक्षण किया।
इस अवसर पर उन्हें मिराज में लगने वाले विभिन्न बम तथा अन्य विशेषताओं से अवगत कराया गया। इतना ही नहीं मिराज विमान की सीढ़ियों पर चढ़कर रक्षा मंत्री ने मिराज की क्षमताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर एक वीडियो डिसप्ले भी रक्षा मंत्री को दिखाया गया, जिसमें मथुरा में मई माह में यमुना एक्सप्रेसवे पर उतारे गए विमान की जानकारी दी गई।
वायुसेना ने रक्षा मंत्री को अवाक्स रडार सिस्टम तथा एयर टू एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम सहित वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आयुध की भी जानकारी दी। इस अवसर पर एयर मार्शल अरूप राहा, सेंट्रल एयर कमांड के एयर मार्शल केएस गिल, महाराजपुरा एयरबेस के एयर कमोडोर एचएस बसरा आदि मौजूद थे।