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'आधार' का ही नहीं है कोई कानूनी आधार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 23 Apr 2013 12:24 AM IST
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आधार की खामियों को लेकर विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को आईना दिखा चुकी संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने कहा है कि यूआईडी प्राधिकरण कानूनी आधार के बिना काम कर रहा है। क्योंकि इस बाबत अब तक कोई कानून नहीं बना है।
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इसलिए सरकार को राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक 2010 में संशोधन कर उसे संसद के अगले सत्र में पेश कर देना चाहिए।
स्थायी समिति ने पिछले तीन साल में यूआईडी प्राधिकरण की ओर से कितने आधार कार्ड बांटे जा चुके हैं, इसकी जानकारी हासिल करने की इच्छा जताई है। साथ ही कार्ड संबंधित शिकायतों का निपटारा और सजा के प्रावधान के बारे में विस्तृत ब्यौरा पेश करने की बात भी कही गई है।
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प्रत्येक आधार कार्ड पर सरकार की ओर से किये जा रहे खर्च के ब्यौरे को भी जानने की इच्छा समिति ने जाहिर की है।
समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि यूआईडी प्राधिकरण को नया कानून बनाने के लिए तमाम सुझाव देने के करीब 15 माह गुजरने के बाद भी सरकार ने इस संबंध में संसद में विधेयक पेश नहीं किया है।
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समिति इससे चिंतित है कि पिछले तीन वित्त वर्ष में इस योजना के मद में 2342 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं। जबकि चालू वित्त वर्ष में 2620 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सरकार को प्राथमिकता के साथ विधेयक पेश करना चाहिए।
गौरतलब है कि स्थायी समिति ने अपनी पिछली रिपोर्ट में सरकार से यूआईडी योजना की समीक्षा और पुनर्विचार का सुझाव पेश किया था।
साथ ही राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक, 2010 को नए सिरे से संशोधित कर संसद के समक्ष पेश करने को कहा था। लेकिन अब तक संशोधन को लेकर स्थायी समिति को कोई सूचना सरकार से नहीं मिली है।