जहां आज भी किराए के भवन में चलती है विधानसभा

Praveen Dwivedi Updated Mon, 01 Dec 2014 09:07 AM IST
A place where secretariat run from rent house
ख़बर सुनें
अविभाजित बिहार का दक्षिणी इलाका खनिज और प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर था। मगर आदिवासी बहुल इस इलाके पर सत्ता में बैठे लोगों का ध्यान कभी नहीं जाता था। यह इलाका सम्पदा के दोहन, उदासीनता और शोषण का पर्याय बन चुका था। इसलिए कई दशकों पहले इसको अलग करने की मांग ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया।
लम्बे संघर्ष के बाद 15 नवम्बर 2000 में बिहार के दक्षिणी इलाके को अलग कर झारखंड राज्य का गठन किया गया। लेकिन 14 सालों के बाद भी झारखंड की ना तो अपनी विधानसभा है, ना सचिवालय और ना ही कोई ठोस आधारभूत संरचना।

आखिर ऐसी बदहाली क्यों हुई और इसके लिए कौन दोषी है? साल 2000 में झारखंड के गठन के बाद से यहां हुकूमत करने वाली सभी सरकारें किराए के भवनों में चलीं और इसीलिए इन सरकारों पर 'किराए की सरकार' का ठप्पा लगा रहा। नौ मुख्यमंत्री, 16 मुख्य सचिव, दस पुलिस महानिदेशक। यह है झारखंड के गठन के 14 सालों का सफर।

हालाकि बतौर मुख्य मंत्री अर्जुन मुंडा कई बार कुर्सी पर रहे मग़र कोई भी मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी पर तीन सालों से ज्यादा नहीं टिक पाया। इन सबके बीच एक निर्दलीय विधायक को भी झारखंड का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।
आगे पढ़ें

बदहाली का ठीकरा किसके मत्थे?

RELATED

Spotlight

Most Read

India News Archives

पहली बार बांग्लादेश की धरती से विद्रोहियों के ठिकाने पूरी तरह से साफ: BSF

भारत की पूर्वी सीमा पर दशकों से चले आ रहे सीमा पार विद्रोही शिविरों को लेकर एक अहम जानकारी आई है।

18 दिसंबर 2017

Related Videos

बागपत के स्कूल में गैस लीक, 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बागपत में गांव छपरौली के एक प्राथमिक स्कूल में गैस सिलेंडर लीक होने का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मिड डे मील के लिए आया सिलेंडर लीक हो रहा था, गैस लीकेज इतनी ज्यादा थी कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

6 मई 2017

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen