मंत्री ने फिर दिया किसानों का दिल जलाने वाला बयान
एक तरफ तो सरकारें कह रही हैं कि हम किसानों की हर संभंव मदद करने की कोशिश कर रहे हैं , वहीं महाराष्ट्र के कृषि मंत्री एकनाथ खड़से ने कहा है कि किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए कोई हल नहीं है।
खड़से ने विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण की तुलना करते हुए कहा कि आदिवासी कभी आत्महत्या नहीं करते, क्योंकि वो जानते हैं कि जीवन में संघर्ष कैसे किया जाता है।
इससे पहले मुख्यमंत्री फड़नवीस और कृषि मंत्री खड़से ने संयुक्त रूप से कहा था कि सरकार किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए काम कर रही है। किसानों को सलाह मशविरे के की मदद से आत्महत्या करने से रोका जाएगा, लेकिन खड़से ने मीडिया से कहा कि "इस बात की कोई गारण्टी नहीं है कि किसान सलाह मशविरे के बाद भी आत्महत्या करना बंद ही कर देंगे''।
किसानों का हौसला बढ़ाना जरूरी
खड़से पिछली सरकार की आलोचना करने से भी बचे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार जो कुछ भी कर पाई थी, वो उसने किया। लेकिन पिछले साल एक चुनावी रैली में खड़से ने ही कहा था कि ये सरकार किसानों के आत्महत्या करने की जिम्मेदार है।
खड़से ने ये भी कहा कि हमें अपने किसानों का हौसला बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समिति का गठन किया जाएगा जो तनावग्रस्त किसान से मिल कर उसकी काउंसलिंग करेगा।
खड़से से जब ये सवाल किया गया कि आखिर किसानों की आत्म हत्या रोकने का कोई ठोस हल क्यों नहीं निकाला जा रहा है तो उन्होंने कहा कि "आप लोग ही बताइए क्या किया जाए, हम वो सब कुछ करने को तैयार हैं जो हम कर सकते हैं।
सरकार कर रही है दावे
बतातें चले कि महाराष्ट्र सरकार ने यह दावा किया है कि उसने सूखा ग्रस्त 23,811 गांवो के किसानों के लिए 4000 करोड़ रूपये का फण्ड जारी किया है।
सरकार ने ये भी दावा किया है कि वे जल्द ही महाराष्ट्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाकर उसे सूखा ग्रस्त क्षेत्र नहीं रहने देंगे। इस साल बिना मौसम के मूसलाधार बारिश ने किसानों की फसल बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोडी़ है।
पिछले 4 महीने में 641 किसानों ने आत्महत्या की है। वहीं पिछले साल 1981 किसानों ने आत्महत्या की थी।