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घर-घर जाकर मांगा मिट्टी का तेल, और फिर खुद को लगा ली आग

Sat, 08 Aug 2015 08:31 PM IST
Updated Sat, 08 Aug 2015 08:31 PM IST
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A mother goes door to door for kerosene

तीन दशक पहले पति ने छोड़ दिया, सात साल पहले छोटे बेटे की मौत हो गई, बड़ा बेटा नक्सलियों की मदद करने के आरोप में पकड़ा गया और इस वक्त जेल में है।

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ये कहानी है एक दुखियारी मां की जिसने दुखों के पहाड़ो का बोझ उठाते-उठाते आखिर में अपनी मौत का सामान का बंदोबस्त किया और जिंदगी खत्म कर दी।

जिंदगी से जंग करते-करते कोल्लम जिले के मुथुपिलक्कड गांव की इस मां ने सत्तर बसंत गम और अफसोस में गुजार दिए। ये मां जिंदगी से इतनी मायूस हो गई कि घर-घर जाकर मिट्टी का तेल मांगा और खुद को आग के हवालेकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। अस्पताल ले जाते वक्त महिला ने दम तोड़ दिया।
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बेटे को मिले मां के लिए 10 मिनट

A mother goes door to door for kerosene

द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक महिला का नाम चेलम्मा बताया जा रहा है। गांव के कुछ लोगों का ये भी कहना है कि चेलम्मा मानसिक तौर पर बीमार थी।

जब उसका बड़ा बेटा आनंदन गिरफ्तार हुआ तभी से उसकी ऐसी हालत थी। चेलम्मा की मौत के बाद कोर्ट में आनंदन को जमानत देने से इन्कार कर दिया गया।

उसको महज 10 मिनट के लिए उसकी मृत मां को देखने के लिए लाया गया। आनंदन के ऊपर नक्सलियों से संपर्क होने और  धोखाधड़ी और षड़यंत्र रचने का इल्जाम है।

उस पर तमाम गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त होने का भी आरोप है। पुलिस के मुताबिक आनंदन ने दो और लोग रामानन और कोल्लम के साथ माओ नेतारूपेश को मोबाइल फोन मुहैया कराने में मदद की थी।

पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। आनंदन की पत्नी स्यामला ने भी बताया कि चेलम्मा की मानसिक हालत उस वक्त से ठीक नहीं थी जब आठ साल पहले उसके छोटे बेटे की गुजरात में एक वर्कशॉप में हुई दुर्घटना के दौरान मौत हो गई थी।

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बेटे के जेल जाते ही छोड़ दिया खाना-पीना

A mother goes door to door for kerosene

स्यामला ने बताया कि उसका पति आनंदन एक दिहाड़ी मजदूर था। उसके गिरफ्तार होने के बाद मां ने घर में खाना-पीना बंद कर दिया था। वह मुहल्ले में इधर-उधर भटकती रहती थी।

कई बार तो वह घर भी नहीं लौटती थी, और सड़क किनारे पड़ी मिलती थी। तब हम उसे उठाकर घर लाते थे। स्यामला ने बताया कि अगर आनंदन घर में होता तो शायद आज वो जिंदा होती।

पड़ोसी गोपाल कृष्ण पिल्लई ने बताया कि चेलम्मा की हालत तब और बिगड़ गई जब बेटे को जेल हो गई। किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं थी कि थोड़ा-थोड़ा मिट्टी का तेल इकट्ठा करके चेलम्मा खुद की जान ले लेगी। पिल्लई ने कहा कि चेलम्मा की मानसिक हालत को देखते हुए लोगों को उसके जाने का उतना अफसोस नहीं हुआ।

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