पत्नी ने कहा 'हिजड़ा' तो हुआ तलाक
मुबई की एक अदालत ने दो अजीब और अलग-अलग तलाक के मामलों में अपना फैसला सुनाया है। इन दोनों मामलों से अंदाजा लगाया जा सकता है बदलते वक्त में तलाक के बहाने भी कैसे बदल रहे हैं।
पहला मामले में पत्नी ने पति को हिजड़ा कहा तो पति ने तलाक ही ले लिया। वहीं तलाक के दूसरे मामले में पति ने पंखा नहीं चलाने दिया तो पत्नी ने तलाक ले लिया।
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, तलाक के पहले मामले में पति अपनी पत्नी को बिस्तर पर खुश करने में नाकाम था, जिससे उसकी पत्नी उसे हिजड़ा कहती थी। पति ने कोर्ट को अपनी मुश्किल बताते हुए कहा कि उसकी पत्नी उसे हिजड़ा कहती है जिससे वह अपमान महसूस करता है। इसलिए वह उससे तलाक लेना चाहता है।
पति ने कोर्ट को यह भी बताया कि वह शादी नहीं करना चाहता था लेकिन गलती से शादी कर ली।
पत्नी ने दिया अपना तर्क
व्यक्ति की फरियाद सुनते हुए अदालत ने उसे उसकी पत्नी से तलाक दिला दिया। वहीं मामले पर पत्नी की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उसका पति उसे कहता है वह घरेलू कामों में ध्यान न देकर इधर-उधर की बातें करती है। इसे लेकर उसे घर में प्रताड़ित भी किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने मामले की जांच में आरोप सही पाए जिसके आधार पर कोर्ट ने पति की तलाक मंजूर करने का फैसला दिया। इस केस में दोनों की शादी 2011 में हुई थी। और तब से ही घरेलू कलह जारी रही जिसका परिणाम तलाक हुआ।
वहीं दूसरे मामले में पत्नी की ओर अदालत में तलाक के लिए याचिका दी गई। इस याचिका में कहा गया कि उसका पति अक्सर पंखे का स्विच ऑफ कर देता है और तर्क करने पर बोलता है कि पंखा ज्यादा चलेगा तो बिल ज्यादा आएगा।
इसलिए उसे उसके साथ रहने में परेशानी होती है। इस जोड़े की शादी महज दो साल पहले 2012 में हुई थी।
कोर्ट ने दिलाए 10 लाख रुपए
तलाक के दूसरे मामले में पत्नी ने पति पर आरोप लगाया कि वह आए दिन दहेज में दो लाख रुपए लाने को कहता है। उसने कहा कि शादी के अगले दिन से ही उससे घर का सारा काम करवाया जाने लगा था। ससुराल वाले रोज प्रताड़ित करते थे।
इतना ही नहीं नहीं उसने अदालत को बताया कि उसका पति उसके माता-पिता को फोन भी नहीं करने देता था और न मायके जाने देता था। महिला ने आगे कहा कि उसके पास कुछ भी पैसे नहीं होते जिससे उसे दवाई तक के लिए लोगों से भीख मांगनी पड़ती है। वह नौकरी करना चाहती है लेकिन उसका पति बाहर नहीं जाने देता।
महिला ने दो बच्चों की देख-रेख का हवाला देते हुए कोर्ट से कहा कि वह इससे लिए आरोपी पति से मुआवजा भी दिलाए। महिला पक्ष की दलीलें सुनते हुए अदालत ने पति को तलाक देने का फैसला सुनाया। साथ पति को आदेश दिया कि तलाक के बाद महिला के जीवन-यापन के लिए 10 लाख रुपए का मुआवजा भी दे।