फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   a japan in pm narendra modi constituency kashi.

क्या आपने देखा है काशी का जापान?

Sat, 30 Aug 2014 12:57 PM IST
अनूप ओझा/अमर उजाला, वाराणसी
अनूप ओझा/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 30 Aug 2014 12:57 PM IST
विज्ञापन
a japan in pm narendra modi constituency kashi.

काशी को ससुराल बनाने वाली जापानी युवतियां हों या फिर गंगा तट पर बसे इस प्राचीन शहर के घाटों की मुरीद मेहमान पर्यटक। 30 अगस्त से शुरू हो रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा से उनकी उम्मीदें भी आसमां पर हैं। घाट और संकरी गलियां घूमने आईं नदी तट के शहर क्योटो की छात्रा शकूरा भारत-जापान के बीच दोस्ती के इस कदम को लेकर बेहद रोमांचित हैं।

विज्ञापन


उनकी मानें तो यह दोस्ती दुनिया में विकास के नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है लेकिन विकास के नाम पर काशी की प्राचीनता से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। क्योटा और काशी दोनों की आत्मा एक जैसी है। यहां के घाटों और गलियों की सफाई की कारगर योजना तैयार होनी चाहिए ताकि पर्यटकों को दिक्कतों से दो-चार न होना पड़े।
विज्ञापन


क्योटो से पखवारे भर पहले काशी घूमने आईं शकूरा कोबे विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। पांडेय घाट के एक अतिथिगृह में शुक्रवार की दोपहर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने भारत-जापान के बीच दोस्ती के नए कदम को बेहद सकारात्मक और आज की जरूरत बताया।

विज्ञापन
विज्ञापन

बंगाली टोला में बसता है एक अलग जापान

a japan in pm narendra modi constituency kashi.

शकूरा का कहना है कि क्योटो और काशी में बहुत समानता है। क्योटो में भी मंदिरों की बहुलता है और काशी में भी। वहां भी कला, संस्कृति रग-रग में रची बसी है और यहां भी। फर्क बस इतना है कि इस शहर को साफ-सुथरा रखने में लोग रुचि नहीं लेते।

काशी को विकास के किसी भी मॉडल से जोड़ने या तुलना करने की वे पक्षधर नहीं हैं। उनका मानना है कि सैकड़ों साल पुराने शहर की गलियों, घाटों को सिर्फ साफ-सुथरा रखने के साथ ही गंगा को निर्मल बनाने की योजना तैयार की जानी चाहिए, ताकि दुनिया के लोग इसकी खूबियों से परिचित होते रहें। जापान के ही कोबे की ज्यूरी भी चाहती हैं कि काशी की प्राचीनता संरक्षित की जानी चाहिए।

करीब 30 साल पहले टोक्यो से आकर पांडेय घाट पर शादी रचाने वाली कुमिको ही नहीं, यहां की बहू बन चुकीं ओसाका शहर की मोगूमी भी पीएम मोदी की जापान यात्रा के बारे में सुनने के बाद से बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इस पहल से भारत-जापान संबंधों में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।

पीएम की इस यात्रा को लेकर सुखद सपने उस बंगाली टोला की गलियों में बुने जा रहे हैं जहां एक अलग जापान ही बसता है। वहां चाहे किसी संगीत के कार्यक्रम से जुड़ा इश्तेहार हो या फिर किसी दुकान की पहचान वाला बोर्ड, आप देखेंगे तो हिंदी में नहीं, जापानी में ही लिखा नजर आएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed