IIT प्रोफेसर ने लगाया स्मृति ईरानी के मंत्रालय पर बड़ा आरोप
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर इस बात से हैरान हैं कि कैसे आईआईटी जैसे बढ़िया संस्थानों के लिए निदेशक चुनने में सिर्फ 10 मिनट का समय लगा। प्रोफेसर धीरज सांघी ने सवाल उठाया है कि आईआईटी के निदेशकों के लिए 36 लोगों के इंटरव्यू को सिर्फ 6 घंटे में पूरा कर लिया गया।
मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पिछले महीने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के नेतृत्व में आईआईटी पटना, आईआईटी रोपड़ और आईआईटी भुवनेश्चर में निदेशक पदों के लिए इंटरव्यू हुए थे। एक दिन रविवार को सिर्फ 6 घंटे में सारे इंटरव्यू हो गए।
टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर धीरज सांघी ने इस प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि जिस तरह से साक्षात्कार हुए हैं वह निदेशक चुनने की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि 10 मिनट केवल उसी व्यकित को चुना जा सकता है जिसको सेलेक्शन पैनल पहले से जानता हो।
गौरतलब है कि कल देर रात आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर आर वी राजा कुमार को आईआईटी भुवनेश्चर का, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर पुष्पक भट्टाचार्य को आईआईटी पटना, प्रोफेसर सरित कुमार आईआईटी मद्रास को आईआईटी रोपड़ का निदेशक नियुक्त किया गया है।
पांच मिनट में एक प्रजेंटेशन तैयार!
जब केंद्रीय मानव ससांधन मंत्री स्मृति ईरानी से इस बाबत प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं आपको कोई इंटरव्यू नहीं दे रही हूं। आईआईटी कानपुर के चेयरमैन प्रो. एम आनंदाकृष्णन जो कि सेलेक्शन कमेटी के सदस्य भी हैं ने बताया कि अब चयन हो चुका है और अब मैँ कोई कमेंट नहीं करना चाहता हूं। अब हमें नए विवाद बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सांघी ने टेलीग्राफ से बातचीत में बताया कि इंटरव्यू से पहले ही लोगों का चयन कर लिया गया था। सांघी ने कहा कि किसी संस्थान के निदेशक में लीडरशिप की क्षमता होनी चाहिए। जो संस्थान को टीचिंग, रिसर्च और इंडस्ट्री के साथ नए आयामों तक ले जा सके।
गौरतलब है कि जब पिछले माह मानव संसाधन मंत्री ने आईआईटी निदेशक के लिए इंटरव्यू लिए थे तो एक अभ्यर्थी को सिर्फ पांच मिनट में एक प्रजेंटेशन तैयार करने के लिए दिया गया और बाकी पांच लोगों उससे प्रश्न पूछ रहे थे।
सांघी ने बताया कि पांच मिनट बहुत कम होते हैं जिसमें कोई अभ्यर्थी अपना विजन दिखा सके। उन्होंने कहा कि निदेशक का चुनाव करने वाले पैनल को इंस्टीट्यूट में जाना चाहिए और पता करें कि संस्थान की असल जरूरत क्या है?