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शर्मनाक था जलियांवाला बाग हत्याकांडः कैमरन
अमृतसर/ब्यूरो
Updated Wed, 20 Feb 2013 10:16 PM IST
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जलियांवाला बाग की यह वही गली थी, जिससे होकर अप्रैल 1919 में जनरल डायर ने अपने सिपाहियों के साथ प्रवेश किया था और एक बड़े नरसंहार को अंजाम दिया था। करीब 94 वर्ष बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी बुधवार को इसी रास्ते से जलियांवाला बाग में प्रवेश किया। कैमरन ने यहां सिर झुकाकर और पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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लौटते वक्त उन्होंने जलियांवाला बाग के सूचना केंद्र की विजिटर्स बुक में 1919 की घटना को ब्रिटिश सरकार के इतिहास की बेहद शर्मनाक घटना लिखा। उन्होंने लिखा कि हमें इस घटना को भूलना नहीं चाहिए। हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि दुनिया में शांतिपूर्वक होने वाले सभी प्रदर्शनों का ब्रिटेन समर्थक है।
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इससे पहले कैमरन सुबह 9:40 बजे कड़ी सुरक्षा में श्री हरिमंदर साहिब पहुंचे, जहां उन्होंने माथा टेका। उन्हें हरिमंदर साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से सिरोपा भेंटकर सम्मानित किया गया। कैमरन श्री गुरुराम दास लंगर हाल में गए और लंगर प्रथा की प्रशंसा की।
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उन्होंने लंगर में पकाई जा रही रोटियां देखीं और खुद भी रोटियों को सेंक कर देखा। कैमरन श्री अकाल तख्त साहिब पर भी माथा टेकने गए। उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ मौजूद थे।
क्या लिखा कैमरन ने विजिटर बुक में
ब्रिटिश पीएम ने विजिटर बुक में लिखा: ‘13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग की घटना शर्मनाक और कभी न भूलने वाली है।
कैमरन को साफ-साफ माफी मांगनी चाहिए: संधू
नवांशहर। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे और पीपीपी नेता अभय सिंह संधू ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की ओर से जलियांवाला बाग जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देने को स्वागत योग्य बताया है, पर कहा कि कैमरन को साफ-साफ माफी मांगनी चाहिए थी।
शहीदों की लड़ाई किसी कौम या देश के खिलाफ नहीं थी। वह लड़ाई मुगलों के राज या अंग्रेजों के राज को खत्म करने की नहीं थी, बल्कि वह सिस्टम को बदलना चाहते थे। ऐसा देश चाहते थे, जहां आदमी के हाथों आदमी की लूट न हो।
आत्मा को सुकून मिला होगा
संगरूर। शहीद ऊधम सिंह के परिजनों ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन द्वारा जलियांवाला बाग कांड को शर्मनाक बताने संबंधी बयान का स्वागत किया है। ऊधम सिंह के भांजों ने कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बयान से उनके मामा की आत्मा को सुकून मिला होगा।
शहीद के भांजे खुशी नंद ने कहा कि ब्रिटिश पीएम के बयान ने ऊधम सिंह की सोच को सही साबित किया है। शहीद के भांजों ज्ञान सिंह और खुशी चंद ने ब्रिटिश पीएम से आग्रह किया कि इंग्लैंड में उनके मामा शहीद ऊधम सिंह की जिंदगी से जुड़ी वस्तुएं भारत भेजी जाएं। विदेश में शहीद की किताबें, कपडे़, रिवाल्वर व हस्तलिखित दस्तावेज पडे़ हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि शहीद ऊधम सिंह को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा दिया जाए।
पंजाब का चावल खाएगा ब्रिटेन
जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करने के बाद कैमरन अमृतसर और इंग्लैंड के व्यापारियों के बीच चावल निर्यात संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर के लिए तरनतारन स्थित लालकिला राइस ब्रांड के मिल भी गए।