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कामकाजी महिलाओं में है असुरक्षा की भावना

Wed, 19 Dec 2012 01:24 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 19 Dec 2012 01:24 AM IST
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92 percent working women feel insecure in delhi ncr

दिल्ली में 92 फीसदी कामकाजी महिलाएं सूरज ढलते ही खुद को असुरक्षित महसूस करने लगती हैं। आलम यह है कि यहां सार्वजनिक वाहनों से सफर करने वाली प्रत्येक तीन में से एक महिला खुद को असुरक्षित मानती हैं। उद्योग संगठन एसोचैम के दावे के मुताबिक बंगलूरू में 85 फीसदी और कोलकाता में 82 फीसदी महिलाओं ने भी इसी असुरक्षा की भावना को उजागर किया है।

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संगठन की ओर से दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और देहरादून में कराए गए सर्वे में सौ फीसदी महिलाओं ने असुरक्षा को किसी भी अन्य समस्या से ऊपर बताया। सर्वे के मुताबिक आईटी, बीपीओ, नर्सिंग होम, नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्र में काम करने वाली ज्यादातर महिलाएं रात्रि सेवा के  दौरान खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
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एसोचैम के महासचिव डीएस रावत का कहना है कि इन क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को विशेष रूप से ड्यूटी खत्म होने के बाद शारीरिक और गैर शारीरिक उत्पीड़न को बर्दाश्त करना पड़ता है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में पिछले दो साल में प्रत्येक तीन में से दो महिलाएं किसी न किसी तरीके से शारीरिक उत्पीड़न की शिकार हुई हैं।
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सर्वे में शामिल महिलाओं ने सख्ती से कहा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में डाला जाना चाहिए और इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। इस मामले में एसोचैम ने सरकार को सभी कैब और सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस लगाने की सलाह दी है। ताकि अपराध दर कम करने में मदद मिल सके।

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