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कैश सब्सिडी स्कीम: कितनी सही, कितनी गलत

Sun, 02 Dec 2012 10:10 AM IST
नोएडा/इंटरनेट डेस्क
नोएडा/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 02 Dec 2012 10:10 AM IST
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84 per cent liked the direct cash scheme

वोटरों को लुभाने के लिए सरकार ने डायरेक्टर कैश सब्सिडी स्कीम लॉन्च की है जिसके तहत सब्सिडी का पैसा सीधे लोगों के अकाउंट में जाएगा, लेकिन हकीकत में ये स्कीम लोगों को पसंद आ रही है या नहीं, ये जानने के लिए दिल्ली सरकार ने 100 लोगों पर एक पायलट सर्वे किया। इस सर्वे के तहत दिल्ली के रघुवीर नगर में रहने वाले 100 लोगों को 1,000 रुपये दिए गए। सर्वे में ये पाया गया कि 100 में से 84 फीसदी लोगों को डायरेक्ट कैश स्कीम पसंद आई।

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लेकिन अब भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें डायरेक्टर कैश सब्सिडी रास नहीं आ रही। लोगों के घरों में काम करके पैसा कमाने वाली गीताबेन इस सर्वे से महज 1 हफ्ते में बाहर हो गईं। इनका कहना था कि राशन सिस्टम कैश सब्सिडी से बेहतर है क्योंकि कैश सब्सिडी के तहत जो पैसे इन्हें मिलते हैं, वो बहुत जल्दी खत्म हो जाते हैं।
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दूसरी ओर ये भी पाया गया है कि जिन लोगों को कैश सब्सिडी पसंद आ रही है वो लोग मिले हुए पैसों का इस्तेमाल खाने की चीजें खरीदने के बजाए दूसरी चीजें खरीदने के लिए कर रहे हैं। जैसे सड़कों पर सामान बेचने वाली सीमाबेन ने स्कीम के तहत दिए गए कैश का इस्तेमाल बर्तन खरीदने के लिए किया। बाद में इन्होंने बर्तन बेच कर मुनाफा कमाया।
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जिस एनजीओ ने ये सर्वे कराया उसने भी सरकार को बताया कि कैश सब्सिडी प्लान लागू करना बेहद मुश्किल हो सकता है। एनजीओ के मुताबिक वैसे तो स्कीम के तहत लोगों को कई परेशानियां हो रही हैं लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत है बैंक अकाउंट खोलना। जाहिर है कि जब तक सरकार स्कीम की कमियों को दूर नहीं करेगी, कैश ट्रांसफर के जरिए वोटरों को लुभाने का सपना शायद पूरा ना हो।

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