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नसबंदी ऑपरेशन के बाद 11 महिलाओं की मौत

Tue, 11 Nov 2014 11:12 PM IST
Updated Tue, 11 Nov 2014 11:12 PM IST
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8 women dead, 52 hospitalized after sterilization surgery

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरकारी स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण नसबंदी के ऑपरेशन के बाद 11 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 49 अन्य को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। इनमें से 18 की हालत गंभीर बनी हुई है।

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प्राथमिक रिपोर्ट में अत्याधिक खून बहने और संक्रमण के कारण महिलाओं की तबियत बिगड़ने और उलटियां होने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने चार अधिकारियों को निलंबित कर ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर आरके गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। महिलाओं के इलाज के लिए दिल्ली स्थित एम्स से डॉक्टरों की एक टीम बिलासपुर रवाना हो रही है।
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जिलाधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेसी ने कहा कि बिलासपुर शहर से दूर पेंडारी गांव में निजी अस्पताल में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में शनिवार को नसबंदी के ऑपरेशन के बाद दवा देकर उसी दिन महिलाओं को घर भेज दिया गया, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही उनकी तबियत बिगड़ने लगी।
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सोमवार को तबीयत बिगड़ने के बाद 53 महिलाओं को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (सिम्स) लाया गया। रास्ते में ही एक महिला की मौत हो गई। दूसरी महिला ने अस्पताल में दाखिल होते ही दम तोड़ दिया।

घटना की जांच के आदेश

8 women dead, 52 hospitalized after sterilization surgery
सिम्स में जब 24 महिलाओं की हालत में सुधार नहीं आया तो उन्हें अपोलो अस्पताल और किम्स केयर व जिला अस्पताल में शिफ्ट किया गया। सोमवार की रात ढाई बजे तक सात महिलाएं दम तोड़ चुकी थीं। मंगलवार को दिन में चार और महिलाओं की मौत हो गई। इन सभी महिलाओं की उम्र 32 वर्ष से कम थी।

बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी आरके भांगे, लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. आरके गुप्ता, प्रदेश कार्यक्रम संयोजक (परिवार नियोजन) डॉ. केसी उरांव और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण यह घटना घटी है।

घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। मृत महिलाओं के परिजनों को चार-चार लाख और बीमार महिलाओं को 50-50 हजार रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई है।

क्या डॉक्टर ने पुराने औजारों का इस्तेमाल किया?
रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने पुराने औजारों का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं औजारों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले उन्हें संक्रमण मुक्त भी नहीं किया गया। बिलासपुर के पास सकरी में नेमीनाथ जैन मेमोरियल चैरिटेबल अस्पताल, जहां कैंप लगाया था, उसे देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह जगह लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं थी। वहां पड़े पलंग व फर्नीचर आदि पर धूल की परतें जमी हुई थीं।

6 घंटे में किए 83 ऑपरेशन

8 women dead, 52 hospitalized after sterilization surgery

डॉक्टर ने लेप्रोस्कोपी तकनीक (दूरबीन के जरिए ऑपरेशन) के जरिए केवल छह घंटे में 83 महिलाओं के ऑपरेशन कर दिए। दिशानिर्देशों के मुताबिक कोई भी डॉक्टर एक दिन में 30 से अधिक ऑपरेशन नहीं कर सकता।  

पीएम ने कहा, कार्रवाई करें सीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से पूरी जांच करवाकर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा है कि आसियान सम्मेलन में भाग लेने म्यांमार की राजधानी नेपित पहुंचे पीएम ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए यह राज्य के मुख्यमंत्री से बात की।

इस मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। पहली नजर में यह डॉक्टरों की लापरवाही लगती है। दवाओं की गुणवत्ता, सर्जरी के मानक और ऑपरेशन के बाद उठाए गए कदम की विस्तृत जांच होगी।

रमन सिंह का बेतुका बयान
घटना के बाद कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अग्रवाल का बचाव करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री कोई ऑपरेशन नहीं करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने भी बाद में कहा कि वह मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने भी यह पहले ही स्पष्ट कर दिया है।

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