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7 महीनों में 9 दंगे, क्या कर रही है अखिलेश सरकार?
नई दिल्ली/अवनीश पाठक
Updated Fri, 26 Oct 2012 01:01 AM IST
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सात महीने पहले उत्तर प्रदेश की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुख्ता कानून व्यवस्था का भरोसा दिलाया था। लेकिन इस अंतराल में ही प्रदेश में 9 सांप्रदायिक झड़पें हुईं। इनमें 18 मौतें हुईं और सैंकड़ों लोग घायल हुए। इनसे हुए आर्थिक नुकसान का अनुमान अब तक नहीं लगाया गया है।
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दिलचस्प यह रहा है कि सभी झड़पों के बाद प्रशासन व पुलिस पर गाज गिरी। मुख्यमंत्री ने घटना की जांच कराने के आदेश दिए। हालांकि किसी भी दंगे की जांच अब तक पूरी नहीं हुई। लगातार हो रही सांप्रदायिक झड़पों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अखिलेश सरकार आखिर कर क्या रही है? सांप्रदायिक तत्वों के आगे इसने घुटने क्यों टेक दिए हैं?
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फैजाबाद प्रदेश में दंगों की भेंट चढ़ा 9वां शहर है। यहां सांप्रदायिक तनाव के कारण अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। बुधवार को प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक लड़की से की गई छेड़खानी के बाद यहां दो समुदायों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई दुकानों और वाहनों को जला दिया गया। मौके पर पत्थरबाजी भी की गई, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हो गए। इस झड़प के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक एसी शर्मा ने प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
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अखिलेश सरकार का जैसा रिकॉर्ड है, उसे देखकर इस बार भी किसी कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी है। इस सरकार के बनते ही पहला सांप्रदायिक संघर्ष प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र में जून में हुआ था। तब विधानसभा सत्र चल रहा था और सदन में यह मसला भी उठा था। यह दंगा एक दलित बालिका से दुराचार की घटना के बाद हुआ था। इसे खासी दिक्कत के बाद काबू र्में पाया जा सका था।
इसी महीने में मथुरा का कोसीकलां इलाका हिंसा का गवाह बना। कोसीकलां में पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी। शरबत पिलाने के एक कार्यक्रम में मामूली कहासुनी से यह विवाद शुरू हुआ था। प्रशासनिक कार्यवाई के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर यादव का तबादला कर दिया गया।
रमजान के महीने में बरेली में हुई सांप्रदायिक झड़प के बाद शहर में कई दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा। इस दंगे में एक व्यक्ति की मौत हुई। अगस्त में म्यांमार और असम में हो रहे दंगों के विरोध में लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद में विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में भारी तोड़फोड़ की गई, जिसके कारण पुलिस को इन शहरों में भी कर्फ्यू लगाना पड़ा।
गाजियाबाद के मसूरी कस्बे में हुए दंगों ने तो प्रदेश की कानून व्यवस्था की कलई ही खोल दी। रेलवे ट्रैक पर एक धार्मिक किताब कि पन्ने मिलने के बाद यह दंगा शुरू हुआ। झड़प में आक्रोशित लोगों ने मसूरी थाने का घेराव किया और वहां खड़े वाहनों को फूंक डाला। इनमें पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में 6 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अधिकारी कर्मचारी समेत दर्जनों लोग घायल हुए।
हर बार इंटेलिजेंस फेल्योर के नाम पर कठघरे में खड़े होने वाले खुफिया विभाग ने कुछ अरसा पहले ही राज्य सरकार को इस बात की ताकीद की थी कि त्योहारों के मौके पर असामाजिक तत्व सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इस चेतावनी को पेशबंदी समझ कर अनदेखा कर दिया गया। हालांकि, आला अफसर इस चेतावनी के बारे में औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।