खुशखबरी: यूपी में बनेंगे 7 एयरपोर्ट
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हवाई सेवाओं के नक्शे पर उत्तर प्रदेश को उभारने के लिए एक बड़ी पहल हुई है। राज्य में सात हवाई अड्डों के विकास के लिए सोमवार को यूपी सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच समझौता (एमओयू) हुआ है।
इसके तहत मेरठ, मुरादाबाद, फैजाबाद, बरेली, कानपुर, इलाहाबाद और आगरा में एयरपोर्ट विकसित होंगे। इसके लिए जमीन राज्य सरकार निशुल्क मुहैया कराएगी जबकि निर्माण का पूरा खर्च एयरपोर्ट अथॉरिटी को उठाना है।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस फैसले का श्रेय लेने की होड़ भी केंद्र और राज्य के बीच रहेगी।
आगे नहीं बढ़ पाया सैफई में एयरपोर्ट का मामला
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री अजित सिंह की मौजूदगी में हुए इस एमओयू पर एएआई के अध्यक्ष आलोक सिन्हा और उत्तर प्रदेश के उड्डयन सचिव एसके रघुवंशी ने हस्ताक्षर किए।
एमओयू के तहत मेरठ, मुरादाबाद और फैजाबाद में नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे, जबकि आगरा, इलाहाबाद, बरेली और कानपुर में सेना के हवाई अड्डों के साथ नियमित कमर्शियल उड़ानों के लिए सिविल एनक्लेव बनेंगे।
मेरठ, मुरादाबाद और फैजाबाद में राज्य सरकार की हवाई पट्टियां हैं। मुलायम सिंह के गढ़ सैफई में एयरपोर्ट का मामला फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाया है। इस एमओयू के मौके पर उत्तर प्रदेश के उड्डयन निदेशक देवेंद्र स्वरूप और एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ आला अधिकारी भी मौजूद रहे।
कई साल से अटका है मामला
वर्ष 2011 में अजित सिंह के नागर विमानन मंत्री बनने के बाद यूपी में हवाई अड्डे का मुद्दा जोर पकड़ने लगा था। लेकिन लंबे समय तक यह मामला राज्य और केंद्र के बीच उलझा रहा।
गत सितंबर में राज्य सरकार हवाई अड्डों के लिए जमीन निशुल्क देने पर सहमत हो गई थी। इसके बावजूद एमओयू होने में करीब चार महीने निकल गए। एमओयू होने के बाद एयरपोर्ट विकसित होने में कम-से-कम दो साल लगेंगे।
एयरपोर्ट अथॉरिटी को यूपी में 7 एयरपोर्ट विकसित करने के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का खर्च करना पड़ेगा। इसके लिए अथॉरिटी निजी भागीदारी की संभावनाएं भी तलाश कर सकती है।
राज्य सरकार को भी 711 एकड़ जमीन खरीदकर एएआई को देनी होगी। जमीनें शहरी इलाकों के आसपास होने की वजह से भूमि अधिग्रहण पर भारी खर्च आने का अनुमान है।
हवाई सेवाओं में पिछड़ा है यूपी
राज्य सरकार ने मेरठ, मुरादाबाद और फैजाबाद की हवाई पट्टियां एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी हैं। अथॉरिटी की टीम इनका सर्वे कर चुकी है। जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लू-प्रिंट तैयार किया जा रहा है। आगरा, इलाहाबाद, बरेली और कानपुर में कई सुविधाएं मौजूद हैं, इसलिए यहां सिर्फ नए सिविल एनक्लेव बनाए जाएंगे।
एविएशन विशेषज्ञ अंबर दुबे का कहना है कि देश का प्रमुख राज्य होने के बावजूद यूपी में सिर्फ 2 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। हवाई यातायात में भी यूपी की हिस्सेदारी बेहद कम है।
राज्य में नए एयरपोर्ट बनने से इन शहरों के लिए नियमित उड़ानों का रास्ता साफ हो जाएगा। राज्य के औद्योगिक और पर्यटन विकास के लिए हवाई संपर्क बेहद जरूरी है।