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'एक साल में 62 लाख लोगों की कर दी नसबंदी'

Sat, 15 Nov 2014 06:00 PM IST
Updated Sat, 15 Nov 2014 06:00 PM IST
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'62 lakh sterilization in one year.'

छत्तीसगढ़ के सरकारी नसबंदी शिविरों में 15 महिलाओं की मौत ने भारत की लचर नसबंदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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विश्व बैंक, स्वीडिश इंटरनेशनल डेवेलपमेंट अथॉरिटी और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष से मिले अरबों डॉलर के क़र्ज़ के दम पर भारत में नसबंदी अभियान की शुरुआत 1970 के दशक में हुई।

भारत में महिलाओं के मुक़ाबले बहुत कम पुरुष नसबंदी कराते हैं। 1975 में आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रा अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने इस अभियान को 'उग्र' तरीक़े से आगे बढ़ाया और कई लोगों का कहना है कि इसमें सबसे अधिक निशाने पर ग़रीब आबादी रही।
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ऐसी भी ख़बरें सामने आई थीं, जिनमें पुलिस ने गांव को घेर लिया और पुरुषों को जबरन खींचकर उनकी नसबंदी की गई। इस अभियान को सलमान रश्दी के उपन्यास 'मिडनाइट चिल्ड्रन' में भी जगह मिली।
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वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार मारा विस्टेंडाल के अनुसार आश्चर्यजनक रूप से एक साल के भीतर ही लगभग 62 लाख लोगों की नसबंदी की गई, जो कि 'नाज़ियों द्वारा की गई नसबंदियों से 15 गुना अधिक थी।' इस दौरान ग़लत ऑपरेशनों से दो हज़ार लोगों की मौत हुई थी।

काला इतिहास

'62 lakh sterilization in one year.'

विस्टेंडाल ने बताया कि सरकार प्रायोजित जनसंख्या नियंत्रण के मामलों में भारत का इतिहास काफ़ी ख़राब रहा है। अक्सर इसमें ग़रीबों और वंचितों को निशाना बनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में ग़रीब महिलाओं की दुखद मौत से साबित हुआ है कि अब भी ऐसा हो रहा है।

1970 के दशक से जब से परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत हुई है, तभी से भारत में आबादी नियंत्रण के लिए ध्यान महिलाओं पर ही केंद्रित रहा है, जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि महिलाओं के मुक़ाबले पुरुषों की नसबंदी आसान है।

विस्टेंडाल कहती हैं, "ऐसा इसलिए है क्योंकि मान लिया गया कि महिलाओं का इसका विरोध करने की संभावना कम है।"

नियमों का उल्लंघन

'62 lakh sterilization in one year.'

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में 2013-14 के दौरान 40 लाख नसबंदियां की गई। पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा एक लाख से भी कम रहा।

नसबंदी के दौरान ग़लत ऑपरेशन से हुई मौतों की बात करें तो 2009 से 2012 के बीच 700 से भी अधिक मौतें हुईं। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने के 356 मामले सामने आए।

सरकार ने सुरक्षित नसबंदी के लिए कई मानक और नियम बनाए हैं, लेकिन नसबंदी कराने के बड़े लक्ष्य के चलते ऑपरेशन में गड़बड़ियां होती हैं और नतीजा मौतों के रूप में सामने आता है।

चीन में 1980 के दशक में आबादी पर नियंत्रण के लिए नसबंदियां शुरू की गई और वहां भी नसबंदी के दौरान महिलाओं की मौत होती है, लेकिन विस्टेंडाल कहती हैं, "भारत के नसबंदी शिविरों की हालत ज़्यादा बुरी है।"

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