देश के विश्वविद्यालयों का ये सच जानकर चौंक जाएंगे आप
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देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के 39 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 6,251 यानी 37.5 फीसदी पद खाली पड़े हैं।
शिक्षकों के अलावा क्लर्क और प्रशासकीय स्टाफ के 8,624 पद भी खाली हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को अगला शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले सभी खाली पद भरने के सख्त आदेश दिए हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 485, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 701, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 513 और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 66 पद खाली पड़े हैं।
उत्तराखंड के हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय में 164, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में 119, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में 144, जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय में 90 और पंजाब यूनिवर्सिटी में 107 पद खाली हैं।
दुनिया की 200 टॉप यूनिवर्सिटी में भारत नहीं
यूजीसी ने इन पदों को अगले शैक्षणिक सत्र से पहले भरने के आदेश दिए हैं। हालांकि मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पीएचडी और नेट क्वालीफाइड उम्मीदवारों की नौकरियों के लिए एक विशेष वेब पोर्टल बनाया गया है।
विभिन्न विश्वविद्यालय और बाकी उच्च शिक्षण संस्थान इन उम्मीदवारों की जानकारी वेब पोर्टल से आसानी से ले सकते हैं। वेब पोर्टल का नाम www.ugc.ac.in/jobportal है। यूजीसी के कई बार खाली पदों को भरने के आदेश के बावजूद स्थिति जस की तस है।
उच्च शिक्षा में सुधारों की धीमी गति की वजह से दुनिया के 200 शीर्ष शिक्षण संस्थाओं में से देश का कोई विश्वविद्यालय नहीं है। 2014-15 के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दो एजेंसियों ने अपनी सूची जारी की है।
सरकार ने इन एजेंसियों के आकलन को खारिज करते हुए अपनी खुद की राष्ट्रीय रैकिंग तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा मामलों के सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है।