देश के 60 शहरों में हर दिन पैदा हो रहा 3500 टन प्लास्टिक कचरा
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दिल्ली समेत देश के 60 बड़े शहरों में प्रतिदिन 3500 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हो रहा है। पर्यावरण मंत्रालय की समीक्षा में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि कई राज्यों में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस बाबत कार्ययोजना सौंपने के निर्देश दिए थे। इस कार्ययोजना पर भी सुस्त तरीके से अमल की बात सामने आई है। मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए अब तक किए गए उपायों पर राज्यों से रिपोर्ट मांगी है।
केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावडेकर ने राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों को पत्र लिखकर कचरा निस्तारण के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया है।
प्लास्टिक कचरे से प्रभावित हो रही भूमि-पानी की गुणवत्ता
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्लास्टिक कचरे से होने वाले नुकसान पर अध्ययन किया है। इस अध्ययन के अनुसार लखनऊ में प्लास्टिक कचरे के डंप साइट के पास और कचरे निस्तारण के क्रम में भूमि और पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भी यही स्थिति है। पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है। राज्यों को इस समिति की सिफारिशें भेजी जाएंगी।
इससे पहले राज्यों को कचरा प्रबंधन के लिए रोडमैप बनाने को कहा गया है। अध्ययन के अनुसार प्लास्टिक कचरे से शहरों में कई नाले भी बंद हो जाते हैं। इससे गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
प्लास्टिक कचरा पालतू पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। प्लास्टिक कचरे को खुले स्थानों पर निस्तारित करने से भूमिगत जल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।