असम: 50 हजार लोग घर छोड़कर भागे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
असम के बोडो बहुल कोकराझार और उससे सटे इलाकों में पिछले तीन दिनों के दौरान भड़की जातीय हिंसा में करीब तीन दर्जन अल्पसंख्यकों की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत और मरघट-सा सन्नाटा पसरा है।
सेना और सुरक्षा बल के जवानों के बूटों की आवाजें ही इस सन्नाटे को तोड़ती हैं। एक सींग वाले गैंडों के लिए दुनियाभर में मशहूर मानस नेशनल पार्क से सटे खागड़ाबाड़ी समेत कई दर्जन गांवों में अब ज्यादातर लोग घरबार छोड़कर जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।
50,000 लोगों का पलायन
हिंसा के बाद से कोकराझार और बक्सा जिलों के लगभग 50 हजार लोग इलाके से पलायन कर चुके हैं। करीब 300 परिवारों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है।
बोडो उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) से जुड़े गुट की ओर से बुधवार रात से तीन दिनों तक अल्पसंख्यकों पर हुए एकतरफा हमलों ने एक बार फिर दो साल पहले हुई हिंसा की यादें ताजा कर दी हैं।
शनिवार के बाद हिंसा की कोई ताजा वारदात नहीं हुई, लेकिन दहशत बरकरार है। आलम यह है कि जिनके घरों के लोग हिंसा के शिकार हुए सिर्फ वही लोग पीछे रह गए हैं। बाकी लोग पड़ोस के धुबड़ी और दूसरे जिलों में चले गए हैं।
गांव वालों ने मुख्यमंत्री के नहीं आने तक शवों का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है। सेना इलाके में फ्लैगमार्च कर रही है। आम लोगों से कहीं ज्यादा सुरक्षा बल के जवान नजर आते हैं।
बेटा भी खोया और पत्नी भी
खागड़ाबाड़ी के रहने वाले मोइनुद्दीन इस हमले में अपना 12 साल का बेटा खो चुके हैं। उनकी पत्नी और बेटी का भी अब तक कुछ पता नहीं चला है। वे कहते हैं, लोकसभा चुनावों के चलते ही हम पर यह कहर टूटा है। हमने 24 अप्रैल को वोट डाला था।
लेकिन इलाके के बोडो लोगों को लगा कि हमने उनके उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया है। अब इन हमलों के बाद राजनीतिक दल इसे राजनीतिक रंग देते हुए एक-दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी थोपने में जुट गए हैं।
लेकिन फिलहाल किसी के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि इलाके के लोगों के दिलोदिमाग में छाई दहशत और यहां पसरा सन्नाटा कब टूटेगा?
वोट को लेकर भड़की हिंसा
हमलों को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर आए मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। राज्य सरकार ने इस हिंसा की जांच एनआईए से कराने की सिफारिश की है। हिंसा के बाद पूरे इलाके में लागू कर्फ्यू में रविवार को चार घंटे की ढील दी गई। पुलिस ने इस हिंसा में उग्रवादियों की सहायता करने के आरोप में 22 लोगों को गिरफ्तार किया है।
वोट को लेकर भड़की हिंसा
बांग्लादेश से आने वाले अल्पसंख्यकों और बोडो तबके के लोगों के बीच हिंसक झड़पें होती रही हैं। दो साल पहले जुलाई, 2012 में भी ठीक ऐसी ही हिंसा में 108 अल्पसंख्यक मारे गए थे। लेकिन इस बार लोकसभा चुनावों की वजह से हिंसा शुरू हुई। बोडो लोगों को लगा कि अल्पसंख्यकों ने उनके उम्मीदवार को वोट नहीं दिया है। बस इसी शक के आधार पर हमले शुरू हो गए।