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चीन सीमा पर तैनात होंगे 50 हजार अतिरिक्त जवान
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 18 Jul 2013 01:18 AM IST
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चीन की ओर से घुसपैठ की कोशिशों के मद्देनजर भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी युद्ध क्षमता को ज्यादा मजबूत करने का फैसला किया है।
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इसके लिए केंद्र सरकार ने एक नई कोर के गठन को हरी झंडी दे दी है।
स्रह्यड्ड इसी के तहत चीन की सीमा पर 50 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जाएगी। बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने नई कोर के गठन को हरी झंडी दे दी। इस पर करीब 65 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
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सूत्रों के अनुसार सरकार की योजना नई कोर तैयार करने की है, जिसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में होगा।
साथ ही बिहार और असम में इसके डिविजन होंगे और लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक इसकी यूनिटें होंगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एनएके ब्राउन की मौजूदगी में हुई बैठक में रक्षा मंत्री एके एंटनी, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और वित्त मंत्री पी चिदंबरम समेत सीसीएस के सदस्य मौजूद थे।
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योजना के मुताबिक वायुसेना भी अपनी क्षमता को बढ़ाते हुए पानागढ़ में छह मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट की तैनाती करेगी।
सेना ने इस संबंध में वर्ष 2010 में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इसे सरकार ने यह कहकर लौटा दिया कि चीन सीमा पर अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए तीनों सेनाएं साथ मिलकर योजना तैयार करें।
सेना को मजबूत करने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में अतिरिक्त बख्तरबंद और तोपखाने भी तैयार किए जाएंगे।
वर्तमान में सेना में युद्ध के लिए सक्षम मौजूदा कोर अधिकतर पाकिस्तान सीमा के पास तैनात हैं, जो कि खासतौर पर जमीन पर लड़ाई करने में सक्षम है।
लेकिन नई कोर पहाड़ी क्षेत्रों में भी युद्ध करने में माहिर होगी। अगले सात वर्षों में सेना अपनी योजना के मुताबिक जवानों की भर्ती और तैनाती करेगी।