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जानिए औरतों पर नेताओं के शर्मसार करने वाले 5 बयान

Sun, 15 Mar 2015 11:42 AM IST
Updated Sun, 15 Mar 2015 11:42 AM IST
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5 shamly statements on women by the leaders

संसद में जदयू नेता शरद यादव के दक्षिण भारतीय महिलाओं के रंग और शरीर की बनावट के बारे में टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया। लेकिन ये पहला मामला नहीं है जब किसी राजनेता ने ऐसा बयान दिया हो जिसे महिला विरोधी माना गया।

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कुछ दूसरे नेताओं के विवादित बयानों पर एक नज़र डालें। भारत में बलात्कार बढ़ने को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, "बलात्कार पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव है और इसीलिए शहरी इलाकों में ज़्यादा होता है। हमारे गांव जहां राष्ट्रीय भावना प्रबल होती है वहां बलात्कार नहीं होते हैं।"
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार विरोधी क़ानून को गलत बताया था। यादव ने कहा था, "जब लड़के और लड़कियों में कोई विवाद होता है तो लड़की बयान देती है कि लड़के ने मेरा बलात्कार किया। इसके बाद बेचारे लड़के को फांसी की सज़ा सुना दी जाती है। बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा अनुचित है। लड़कों से गलती हो जाती है।"

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साक्षी और शीला दीक्षित भी दे चुके हैं विवादित बयान

5 shamly statements on women by the leaders

समाज में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर पूछे गए सवाल पर हरियाणा की एक खाप पंचायत के नेता जितेंद्र छत्तर ने कहा था, "मेरे ख़्याल से फास्ट फूड खाने से बलात्कार की घटनाएं बढ़ती हैं. चाऊमीन खाने से शरीर के हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है. इसी वजह से इस तरह के कार्य करने का मन करता है।"

पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के बाद एक सवाल के जवाब में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था, "महिलाओं को ज़्यादा एडवेंचर्स नहीं होना चाहिए।"

मेरठ में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा था, ''हिंदुत्व की रक्षा के लिए हर हिंदु महिला को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए।''

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