‘हांगकांग’ के 300 करोड़ ने बिगाड़ा खेल
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तिरुपति ग्रुप का कारोबार देशभर में फैला हुआ है। इस कारोबार के साथ ही काली कमाई का साम्राज्य भी एकाएक बढ़ता चला गया। लेकिन हांगकांग से ट्रांसफर हुए 300 करोड़ रुपयों ने कंपनी का सारा खेल बिगाड़ दिया। इसकी भनक आयकर अफसरों को लगी और लंबे होमवर्क के बाद ही तिरुपति ग्रुप पर हाथ डाला गया।
मुजफ्फरनगर में ग्रुप की भोपा रोड पर तिरुपति सिलेंडर के नाम से इंडस्ट्री है। यहां तैयार होने वाले बड़े गैस सिलेंडर देशभर में सप्लाई होते हैं। आयकर की टीमों ने पहले पूरे मामले पर होमवर्क किया और सुबूत हाथ में आने के बाद ही छापेमार कार्रवाई की गई।
मेरठ के दो सुनारों को साथ लिया गया, जिनसे खबर मिली थी कि मालिकानों की तिजोरियों में बड़े पैमाने पर सोना है। तिरुपति ग्रुप के निदेशक वाईके गुप्ता, दिनेश गोयल और आशीष गर्ग के दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, देहरादून, मुजफ्फरनगर, कुरुक्षेत्र एवं पोंटा साहब सहित 24 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की गई।
कई बैंकों के छापे पर मिले अहम राज
छापेमारी में तिरुपति ग्रुप से छह करोड़ रुपए नकदी और 45 बैंक खातों के अभिलेख कब्जे में लिए गए। बैंक खाते ग्रुप के निदेशक दिनेश गोयल, आशीष गर्ग, वाईके गुप्ता के हैं, जो फर्जी पते पर खोले गए हैं।
यह भी जांच की जा रही है कि खाते खुलवाने में किन-किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आयकर महानिदेशक जांच कृष्ण सैनी के अनुसार एप्पल इंडस्ट्रीज भी इसी ग्रुप से जुड़ी है। इसमें कमोडिटी ट्रेडिंग का कारोबार होता है, जिसमें चावल, लोहा और स्क्रैप प्रमुख हैं।
आयकर महानिदेशक की मानें तो ग्रुप के निदेशक के आवास और दफ्तरों से 475 करोड़ के काले धन, बोगस शेयर एवं अन्य संपत्तियों के दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं। इंडस्ट्रीज के खातों में 300 करोड़ रुपये हांगकांग से आए हैं। इसके साक्ष्य छह ठिकानों के छापे में हाथ लगे हैं।
बैंक के रिकार्ड भी खंगाले गए
तिरुपति ग्रुप का अपना आदर्श महिला मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक है। नई मंडी स्थित आवास पर ही एक शाखा है। जांच के दौरान आयकर विभाग की टीमों ने बैंक का रिकार्ड भी अपने कब्जे में लिया है।
बैंक में खाते खोलने का क्या नियम है और नियमों का कितना पालन हुआ है, यह भी परखा जा रहा है। साथ ही बैंक में दूसरे प्रतिष्ठानों के खातों की जांच-पड़ताल भी की जा रही है।