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तूतिकोरिन तट पर 45 ह्वेल मछलियों ने तोड़ा दम

Tue, 12 Jan 2016 10:16 PM IST
Updated Tue, 12 Jan 2016 10:16 PM IST
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45 whales died in tamilnadu

तमिलनाडु के तूतिकोरिन तट पर दिन भर में 45 ह्वेल मरी पाई गईं। यहां काम कर रहे सुगंधि देवदासन समुद्री शोध संस्थान के निदेशक डा. पैटरसन एडवर्ड ने इसकी पुष्टि कर दी है।

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तमिलनाडु के तूतिकोरिन तट पर दिन भर में 45 ह्वेल मरी पाई गईं। यहां काम कर रहे सुगंधि देवदासन समुद्री शोध संस्थान के निदेशक डा. पैटरसन एडवर्ड ने इसकी पुष्टि कर दी है।
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उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "कम से कम 45 ह्वेल मर गईं। इसके अलावा दूसरी 36 ह्वेलों को बचाया जा सका और उन्हें वापस पानी में छोड़ दिया गया। पर वे अभी भी तट के आस पास ही हैं। यह कहना मु्श्किल है कि वे बच पाएंगी या नहीं।" उन्होंने कहा कि पिछली बार इस तरह की घटना 1973 में हुई थी। उस समय यहां 147 ह्वेल मर गई थीं। मौजूदा घटना में मनपद और अलथुलई के बीच पांच किलोमीटर के समुद्री तट पर ह्वेल पाई गईं।

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ह्वेल फिर तट पर आ पंहुचीं

45 whales died in tamilnadu

स्थानीय लोग, सरकारी अधिकारी, एक स्थानीय मत्स्य पालन कॉलेज के छात्र और तमाम दूसरे लोगों ने मिल कर इन ह्वेंलों को वापस पानी की ओर धकेलने की कोशिश की। पर बाद में वे ह्वेल फिर तट पर आ पंहुचीं।

'मरीन मैमल्स ऑफ़ इंडिया' के लेखक और ह्वेल पर काफ़ी अध्ययन करने वाले कुमारन सतसिवम ने बीबीसी से कहा, "यहां यह ज़रूरी है कि तुरंत इन ह्वेलों को वापस पानी की ओर धकेल दिया जाए. ऐसा नहीं हुआ तो ये ह्वेल फिर संकट से घिरी ह्वेल के पास आ जाएंगी।

ह्वेल एक तरह की आवाज़ पैदा करती हैं, जिन्हें मनुष्य नहीं सुन सकता। पर दूसरी ह्वेल सुन कर इकट्ठा होने लगती हैं।" ह्वेल 30-40 के झुंड में चलती हैं. उनके समुद्र तट पर आने की कई वजहें हो सकती हैं. यह मुमकिन है कि किसी एक ह्वेल ने संकट में फंस कर मदद की गुहार लगाई हो।

'तट पर ही मर जाती हैं'

45 whales died in tamilnadu

सतसिवम ने कहा, "इसकी व्याख्या करने के लिए कई सिद्धांत हैं। यह मुमकिन है कि ह्वेल की कान में इनफ़ेक्शन हो और वे आवाज़ पर निर्भर हों. यदि कान ख़राब हो जाए तो उनके पानी में चलने फिरने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।"

उन्होंने इसके आगे कहा, "ह्वेल का वज़न बहुत ज़्यादा होने के कारण तुरंत वापस पानी में लौट जाना ह्वेल के लिए बहुत आसान नहीं होता है. उनका शरीर गर्म हो जाता है. वे तट पर ही मर जाती हैं. उनके शरीर पर लागातार पानी डालते रहना होता है, क्योंकि उनके शरीर का बाहरी स्तर वसा का बना होता है।"

सतसिवम के मुताबिक़, ह्वेल को बचाना बहुत मुश्किल होता है। उन्हें तुरंत वापस पानी में छोड़ना ज़रूरी होता है. इसके बहुत विकल्प नहीं हैं। कई बार ये ह्वेल काफ़ी थक जाती हैं और एक बार फिर तट पर लौट आती हैं।

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