मराठवाड़ा में 400 किसानों ने की आत्महत्या
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महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के तीन जिले भीषण सूखे के चपेट में है। इस साल जनवरी से अब तक बीड, उस्मानाबाद और लातूर के 400 से ज्यादा किसान मौत को गले लगा चुके हैं। सूखाग्रस्त जिलों में बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की फसल पूरी तरह से चौपट हो चुकी है।
उस्मानाबाद जिले के एनसीपी विधायक राणा जगजीत सिंह पाटिल ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत के आधार पर कहा कि इस बार सूखे ने 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पाटिल ने कहा कि सूखे के चलते पिछले तीन साल में 200 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
उस्मानाबाद के कलंब तहसील में खमसगांव के 72 वर्षीय बुजुर्ग हरिभाऊ हनुमंत भेंगरे कहते हैं कि महाराष्ट्र में सन 1972 में सदी का सबसे बड़ा सूखा पड़ा था लेकिन इस साल का सूखा उससे ज्यादा भयानक है। बीड जिले में ज्यादातर किसान गन्ना तोड़ने वाले मजदूर हैं। सूखे के कारण उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
सूखे के कारण किसान कर रहे आत्महत्या
एनसीपी नेता और समाजसेवी भारत भूषण क्षीरसागर कहते हैं कि अकेले बीड जिले से करीब 1.80 लाख लोग मुंबई, पुणे, औरंगाबाद और हैदराबाद पलायन कर चुके हैं।
तुलजापुर तहसील के सिंधफल गांव के 25 वर्षीय युवा किसान भैरू अप्पासाहेब धनके ने बीते 4 सितंबर को खेत में फांसी लगाकर जान दे दी।
कुछ साल पहले उनके पिता ने भी इसी तरह आत्महत्या कर ली थी। अब परिवार में उसकी विधवा मां के साथ विधवा पत्नी 6 साल के बेटे और 12 साल की बेटी के साथ किसी तरह जीवन गुजार रही है।