इराक में फंसे 40 भारतीय, दहशत में परिजन
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मजदूरी करने इराक गए 41 पंजाबी युवक इस समय वहां गृहयुद्ध में फंस गए हैं। पिछले साल ये नौजवान इराक की एक कंपनी में काम करने गए थे।
इराक के मोसुल व तिकरित कस्बों में आतंकी संगठनों के कब्जे के बाद जिस कंपनी में ये नौजवान काम करते थे वह कंपनी भी भाग खड़ी हुई है। अब वहां के हालात की जानकारी पाकर उनके घरों में दहशत का माहौल है।
वहीं इस पूरे मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हम घंटे-दर-घंटे पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। हम इराक में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
अकबरुद्दीन ने बताया कि विदेश मंत्रालय के सेकेट्री (पूर्व) अनिल वाधवा ने इराक के राजदूत से भी मुलाकात की है। इराक के राजदूत ने उन इलाकों से संपर्क स्थापित करके फंसे हुए भारतीयों के बारे में विदेश मंत्रालय को सूचनाएं दी हैं।
जेहादियों के कब्जे में 41 पंजाबी युवक
अमृतसर जिले के मजीठा कस्बे के निक्टवर्ती गांव भोयेकला के युवक मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर कौर ने बताया कि उसके भाई मनजिंदर सिंह व उसके साथी जतिंदर सिंह, सोनू, सिमरन व हिमाचल का रहने वाला अमन इराक के आतंकी संगठन और आर्मी के बीच हो रहे युद्ध में फंसे हैं।
मनजिंदर सिंह समेत इराक गए 41 पंजाबी युवक इस समय वहां के जेहादियों के कब्जे में हैं। उन्हें कुछ नही पता चल रहा है। पिछले रविवार उनसे फोन पर बात हुई थी। उसके बाद उनसे कोई संपर्क नही हुआ।
पीएम और विदेश मंत्री से गुहार
मनजिंदर की बहन गुरपिंदर कौर ने बताया कि उनके पास के ही एक गांव की रंजीत कौर का बेटा जतिंदर सिंह भी मनजिंदर के साथ ही वहा फंसा हुआ है।
जतिंदर की मां और पिता भी परेशान हैं। पिता बलकार सिंह का कहना है कि सभी परिवारों ने अपने बच्चों को सही सलामत भारत वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय विदेश मंत्री को अलग अलग पत्र भेजे हैं।