पुणे हादसे में 33 की मौत, 160 अब भी दबे
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जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे पुणे के मालिण गांव में पहाड़ के नीचे दफन हुए लोगों की बचने की उम्मीदें धूमिल होती जा रही है।
बृहस्पतिवार शाम तक 33 शव निकाले जा चुके थे, लेकिन 25 से 30 फीट तक मलबे में अभी भी करीब 160 लोग दबे हुए हैं। इनके बचने की उम्मीद अब न के ही बराबर है। बारिश की वजह से भी बचाव कार्य में बाधा हो रही है।
बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह गांव की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे और उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों 2-2 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की।
गृह मंत्री ने कहा कि हादसे को देखकर लगता ही नहीं कि यहां कभी कोई गांव था। यह बहुत बड़ी प्राकृतिक दुर्घटना है। उन्होंने एनडीआरएफ के बचाव कार्य की सराहना की और कहा कि भारत सरकार की ओर राज्य सरकार को हर संभव मदद दी जाएगी।
धड़कनें सुनकर बचाने की कोशिश
बृहस्पतिवार को एनडीआरएफ की नौ टीमों ने सुबह से फिर बचाव कार्य आरंभ किया क्योंकि बुधवार की रात बारिश और प्रकाश की दिक्कत के चलते कार्य बाधित हो गया था। इस बीच मुंबई के सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने मालिण गांव के पुनर्वास के लिए 50 लाख रुपये सहायता की घोषणा की है।
बचाव कार्य का जायजा लेने के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी बृहस्पतिवार को मालिण पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब पहाड़ की तलहटी में बसे सभी गांवों के पुनर्वास का विचार किया जाना चाहिए।
एनडीआरएफ ने स्पेशल लाइव डिटेक्टर टाइप-1 और टाइप-2 की मशीनें लगाई हैं, जिससे मलबे में दबे लोगों की धड़कनें सुनकर उन्हें बचाया जा रहा है।
पुणे के जिलाधिकारी सौरभ राव ने बताया कि गांव के एक स्कूल को छोड़कर सब कुछ मिट्टी में दफन हो गया है। बचाव कार्य के लिए भारी मशीनों को लगाया गया है। जिंदा बचे लोगों को नुकसान न पहुंचे इसलिए बचावकर्मी बहुत सावधानी से काम कर रहे हैं, जिससे बचाव कार्य थोड़ा धीमा चल रहा है।