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आईएस के ‘जिहाद’ से जुड़े भारत से 300 युवा!

Mon, 15 Jun 2015 08:15 AM IST
Updated Mon, 15 Jun 2015 08:15 AM IST
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 300 youth involving the IS 'jihad'  from India

प्रोपेगेंडा के लिए सोशल मीडिया एक बड़ा औजार बनता जा रहा है। एक भारतीय शोधकर्ता ने चेताते हुए कहा है कि इसकी वजह से भारत के 300 से ज्यादा युवा कथित तौर पर आईएसआईएस द्वारा चलाए जा रहे ‘जिहाद’ से जुड़ चुके हैं। हाल ही में आईएसआईएस से जुड़ने के कई मामले सामने आए हैं।

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ऐसा ही एक मामला तमिल लड़के का है। संदेह है कि वह सीरिया में हुए एक आत्मघाती हमले में शामिल था। वहीं करीब 25 लोगों को आईएसआईएस का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। श्रीनगर में इस दुर्दांत आतंकी संगठन के झंडे कई बार दिख चुके हैं।
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महाराष्ट्र के ठाणे से चार लड़के आईएसआईएस में भर्ती होने के लिए मौसूल तक पहुंच गए थे। इनमें से एक वहां हुए हवाई हमले में मारा गया था जबकि दूसरे को तुर्की ने निर्वासित कर दिया था।
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जेएनयू में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की शोधकर्ता ने किया दावा

 300 youth involving the IS 'jihad'  from India

जेएनयू में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की शोधकर्ता अंकिता चंद्रनाथ ने एक शोधपत्र में लिखा है कि सोशल मीडिया पर आईएसआईएस जबरदस्त प्रोपेगेंडा चला रहा है। संगठन तेजी से मुस्लिम युवाओं को प्रभावित कर रहा है। इससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा कि ‘भारत में मुसलमानों का विकास काफी धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु राज्य प्रणाली में हुआ है। यह कहना अतिश्योक्ति होगी कि भारतीय मुसलमान एक इस्लामिक देश के पक्षधर हैं। जैसा कि आईएसआईएस कहता रहा है।

’ऐतिहासिक तौर पर भारतीय मुसलमानों को मध्य एशिया के देशों के मुकाबले ज्यादा आजादी और समानता हासिल है। सूफी और इस्लाम के दूसरे संप्रदायों की संपन्न परंपराएं मोटे तौर पर समावेशी समाज की हिस्सा रही हैं।

भारतीय मुस्लिमों को कोई भी खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि मौजूदा मोदी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा कैसे करती है।

आईएस के प्रोपेगेंडा से प्रभावित हो रहे मुस्लिम युवा

 300 youth involving the IS 'jihad'  from India

भारतीय उपमहाद्वीप में सऊदी अरब द्वारा वित्त पोषित मदरसों के फलने-फूलने के साथ-साथ ऐसी स्थायी शिक्षा प्रणाली के बारे में सोचना जरूरी है, जो इस्लामी कट्टरवाद के हानिकारक प्रभाव से दूर अधिक स्थायी अवसर प्रदान करे।

यह भारत के राष्ट्रीय हित में है कि वह मध्य एशिया में स्थिरता सुनिश्चित करे। इसकी आर्थिक सुरक्षा और धर्मनिरपेक्ष पहचान इसी पर आधारित है।

यह भारत की जरूरत है कि वह अपने समावेशी चरित्र को बनाए रखे क्योंकि भारतीय मुसलमानों की समस्याएं अरब के मुसलमानों की तरह नहीं हैं।

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