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मोदी सरकार के 30 दिन, 'अच्छे दिनों' के संकेत नहीं

Thu, 26 Jun 2014 10:23 AM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 10:23 AM IST
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30 days of narendra modi government

'मैं, नरेंद्र दामोदर दास मोदी, ईश्वर की शपथ लेता हूं कि....' महीने भर पहले नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो देश को उम्मीदों के पंख लग गए।

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करोड़ों भारतीयों ने भरोसे के साथ उन्हें देखना शुरु किया। चुनावी रैलियों में मोदी की वादे और तीस सालों बाद किसी पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत उस भरोसे का अधिक मजबूत किया।
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मोदी के दावों पर यकीन कर मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया था, दावों को हकीकत बनते देखना उनका सपना था। लेकिन महीने भर बाद ही वादों और दावों से यकीन ऐसा उठा कि सड़क पर सरकार के खिलाफ नारे लगने लगे। मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री बन गए, जिनका पुतला महीने भर के भीतर फूंका गया।

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घोषणापत्र तक सिमट गए भाजपा के वादे

30 days of narendra modi government

महंगाई के मुद्दे पर मोदी ने यूपीए सरकार को चुनावी रैलियों में आड़े हाथों लिया था। उन्होंने निजाम बदलते ही महंगाई को खत्म करने का दावा किया था।

भाजपा के घोषणापत्र में महंगाई से निपटने और कीमतें स्थिर रखने के लिए विशेष फंड बनाने की बात कही गई था। हालांकि, महीने भर के भीतर ही मोदी सरकार ने रेल किरायों में अभूतपूर्व बढोतरी कर भविष्य के संकेत दे दिए। सत्ता संभालने के बाद मोदी ने गोवा में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच देश की अर्थव्यवस्‍था की बावत कहा था कि बीमारी ऐसी है कि कड़वी दवाई देनी ही पड़ेगी।

शुक्रवार को रेल किरायों में 14.2 फीसदी और माल भाड़े में 6.5 फीसदी बढ़ोतरी के बाद देश उन दवाओं की कड़वाहट तीव्रता से महसूस कर रहा है।

'अच्छे दिन' का सपना 'महंगे दिन' में बदला

30 days of narendra modi government

लोकसभा चुनावों में भाजपा का नारा 'मोदीजी आएंगे, अच्छे दिन लाएंगे' बहुत लोकप्रिय हुआ था। अच्छे दिनों के वादे का ऐसा असर था कि भाजपा को 31 फीसदी वोट और 282 सीटें हासिल हुई है।

तीस साल बाद किसी दल को अपने बूते बहुमत मिला। लेकिन महीने भर के भीतर ही ये 'अच्छे दिन' 'महंगे दिनों' में तब्दील हो गए। पिछले शुक्रवार रेलवे के खजाने को भरने के लिए रेल किरायों में बढ़ोतरी की गई।

दो दिन बाद चीनी मिलों को राहत देने के लिए आयात शुल्क 15 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया। नतीजा चीनी की कीमतों में तेजी के रूप में सामने आया। वहीं, खबर ये भी आई की मोदी सरकार एलपीजी सिलेंडर के दामों में 5 से 10 रुपए बढ़ोतरी का फैसला ले सकती है।

राज्यपालों को हटाने पर ‌छिड़ गया विवाद

30 days of narendra modi government

मोदी सरकार ने रेल किरायों में बढोतरी के यूपीए के फैसले को लागू करने में कोताही नहीं बरती, लेकिन पुरानी सरकार के राज्यपाल उसे रास नहीं आए। मोदी के सत्ता संभालते ही राजनीतिक पृष्ठभूमि के राज्यपालों को हटाने की सुगबुगाहट होने लगी थी।

यूपीए सरकार ने 17 ऐसे राज्यपालों को नियुक्त किया था, जो राजनीति में सक्रिय रह चुके थे। शीला द‌ीक्षित सबसे ताजा उदाहरण हैं। उन्हें 11 मार्च को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

नई सरकार ने आते ही ऐसे राज्यपालों को हटाने का संकेत दिया, जिसके बाद विवाद की स्थित बन गई। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर मै राज्यपालों की जगह होता तो पद से हट जाता। इस बयान के बाद ये विवाद और बढ़ गया। हालांकि सरकार के दबाव के कारण बाद में कई राज्यपालों ने इस्तीफा दे दिया।

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