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कल छूट गई तो पढ़ लें चुनाव की ये खबर

Mon, 09 Dec 2013 04:01 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 09 Dec 2013 04:01 PM IST
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3 states go to bjp, aap creates havoc for congress in delhi

लोकसभा चुनावों के फाइनल से पहले सेमीफाइनल मुकाबला माने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पारी से हारी है। तीन राज्य में भाजपा को खुशी मिली और दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कमाल कर दिया। लेकिन हर जगह हार आई, तो कांग्रेस के खाते में।

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एग्जिट पोल इशारा कर रहे थे कि कांग्रेस को बुरी खबर के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन अंतिम नतीजे इस डर से कहीं ज्यादा खौफनाक साबित हुए।

छत्तीसगढ़ में अपना पूरा नेतृत्व साफ होने की वजह से वह इमोशनल वोटिंग की उम्मीद कर रही थी, लेकिन तमाम आरोपों की तोहमत झेलने के बावजूद रमन सिंह लगातार तीसरी बार विजेता बने।
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मध्य प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल रहा, जहां अपनी बढ़िया छवि और सरकारी योजनाओं के दम पर शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर कांग्रेस को कुर्सी से कोसों दूर रखा। पार्टी की सबसे बड़ी हार हुई राजस्थान और दिल्ली में। जयपुर की गद्दी बचाने की कोशिश में जुटे गहलोत करारी शिकस्त मिली और भाजपा भारी अंतर से जीती।
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दिल्ली में 'आप' ने बिगाड़ा खेल
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए रविवार को हुई मतगणना में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं पहली बार राजनीति में कूदी आम आदमी पार्टी (आप) का प्रदर्शन बेहद चौंकाने वाला रहा।

कांग्रेस का ‘नहीं रुकेगी मेरी दिल्ली’ स्लोगन जनता ने नकार दिया और कांग्रेस को तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया। सबसे बड़ा उलटफेर नई दिल्ली सीट पर रहा, जहां मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 25 हजार से ज्यादा मतों से हरा दिया।

शीला समेत उनकी कैबिनेट के मंत्री डॉ. अशोक वालिया, राजकुमार चौहान, प्रो. किरण वालिया, रमाकांत गोस्वामी समेत मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव भी चुनाव हार गए। सिर्फ दो मंत्री अरविंदर सिंह लवली और हारून युसूफ अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।

राजस्थान में वसुंधरा के आगे गहलोत धुआं
भाजपा की चली आंधी ने उसे प्रदेश के इतिहास में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बना दिया है। पार्टी की सफलता में महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान जनता पर मोदी फैक्टर के असर को खासा अहम माना जा रहा है।

इससे पूर्व सबसे अधिक सीटें जीतने का रिकॉर्ड 1998 में कांग्रेस (156 सीटें) के नाम था। इस बार भाजपा की सबसे बड़ी जीत, तो कांग्रेस की सबसे बड़ी हार हुई है। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 43 सीटें मिली थीं।


ASSEMBLI  ELECTION 2013




















कांग्रेस के पास नि:शुल्क दवा-जांच, पेंशन जैसी अच्छी योजनाओं के बावजूद महंगाई और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता पर मोदी का प्रभाव पड़ा। मोदी ने रैलियों में राज्य और केंद्र की कमियां गिनाईं और जनता से ही सवाल किए, जिनका जवाब जनता एक सुर में दे रही थी।

मध्य प्रदेश में शिवराज का 'राज'
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का जनादेश सौंप दिया है। भाजपा के कई प्रमुख मंत्री चुनाव हार गए हैं, फिर भी भाजपा ने 2008 से भी ज्यादा सीटें हासिल करके कांग्रेस को करारा झटका दिया है।

कांग्रेस के प्रमुख नेता सुरेश पचौरी भोजपुर से 18 हजार मतों के बड़े अंतर से चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह भले ही चुनाव जीत गए हैं, लेकिन राजगढ़ जिले की सीटों पर भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की है।

खुद शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी से कांग्रेस के महेंद्र सिंह चौहान को 84,805 मतों से हरा दिया। यह पहले से भी ज्यादा बड़ी जीत है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पार्टी की जीत के लिए प्रदेश की जनता को धन्यवाद दिया है।

छत्तीसगढ़ में रमन फिर बने राजा
छत्तीसगढ़ के बारे में अक्सर कहा जाता रहा है कि वहां सत्ता की चाबी बस्तर के पास है, मगर विधानसभा के नतीजों ने इस मिथक को तोड़ दिया है। इस नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्र में सीटें गंवाने के बावजूद भाजपा छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह की अगुवाई में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है।


पिछली बार भाजपा को बस्तर की 12 में से 11 सीटें मिली थीं। इस बार उसे यहां सिर्फ चार सीटें ही मिली हैं। छत्तीसगढ़ के लोगों ने चाऊर वाले बाबा रमन सिंह पर एक बार फिर से भरोसा जताया है, लेकिन गृहमंत्री ननकीराम कंवर सहित पांच मंत्रियों को मिली हार बताती है कि उनके सहयोगियों की छवि उनकी तुलना में बहुत खराब रही है।

मुख्यमंत्री रमन सिंह राजनांदगांव से 35 हजार से भी अधिक मतों से जीतने में जरूर सफल हुए, लेकिन भाजपा को जिले की छह में से सिर्फ दो ही सीटें मिली हैं। पिछली बार इस जिले में भाजपा के पास चार सीटें थीं।

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